अम्माजी अचारवाली दीदी विजयलक्ष्मी तलाश ली जिंदगी की राह,हुनर से बढ़ा रही लोगों के थाली की स्वाद।

वाराणसी जज्बा और जुनून हो तो कोई भी बाधाएं सफलता में बाधक नहीं बन सकती। नेक इरादे और हौसले ने ही इबारत लिखी है। उसी में से एक और इबारत लिखने के लिए ‘समूह सखी’ विजयलक्ष्मी ने नारी शक्ति समूह बनाकर स्वयं के साथ अन्य महिलाओं को रोजगार देकर 13 अन्य समूह बनाकर छोटी-छोटी इकाई स्थापित कराकर स्वावलम्बन संग आत्मनिर्भरता की अलख जगा रही हैं।

श्रीमती विजयलक्ष्मी मोदनवाल स्व. मृत्युंजय मोदनवाल, निवासी सिंधोरा बाजार, वाराणसी की निवासीनी हैं | परिवार में दो बच्चों सहित एक छोटा सा कुनबा जिसमें सम्मिलित रहन -सहन के साथ बेहतर तालमेल ,सहयोग और समन्वय का जीता जागता एक आदर्श नमूना देखने को मिलता है। ग्रेजुएट विजयलक्ष्मी अपने हुनर, लगन व मेहनत से रोजगार का अवसर देकर लोगों के थाली का स्वाद बढ़ाने हेतु 18 अलग- अलग प्रकार के अचार व जेम बनाने का कार्य कर रही हैं। मुख्य रूप से लहसून, आम, लाल मिर्च, सूरन, कटहल तथा मिक्स अचार की मांग ज्यादा होती है जिसको बनाती रहती है और सरकारी कार्यक्रमों में जगह-जगह स्टाल लगाकर अपने व समूह से जुड़ी महिलाओ के हाथों से बनी लजीज ,स्वादिष्ट अचार ,जैम को सेल करती हैं।

परिवार व समाज की तमाम रूढ़ियों, समस्याओं व परेशानियों से जूझते हुए विजयलक्ष्मी ने अपने आप को समूह व समाज में एक सशक्त व सफल महिला होने का जज्बा दिखाया है। वर्ष 2022 में पति की डेंगू बीमारी से मौत के बाद तो यह और भी टूट चुकी थीं , अब आगे क्या होगा सोच कर परेशान थीं। लेकिन हौसलों में कोई कमी नहीं नजर आई।समूह के माध्यम से इन्हें रास्ता व साहस मिला उसे मुकाम तक पहुँचाने हेतु इन्होने ठान लिया था कि अपनी पहचान बनानी है। दिन -रात सोचती कड़ी मेहनत करती और अपने लक्ष्य के लिए नित ताना-बाना बुनती रहती कुछ अच्छे सपने देखती उसको साकार करने के लिए सोचती रहती थी।

वर्ष2001 में शादी हुई ,शादी के बाद पहले 20 वर्ष तक सामाजिक बन्धनों के चलते घर पर गृहिणी का ही कार्य करती रही ।पति की घर से बाहर जाने की इजाजत नहीं मिली।पढ़ी लिखी ग्रेजुएट होने एवं परिवार की माली हालत बहुत अच्छी न होने पर भी अपने परिवार के लिए कुछ कर नहीँ पा रही थी | विजयलक्ष्मी को शिक्षामित्र के रूप में कार्य करने का अवसर भी मिला ,परन्तु परिवार व पति की सहमती बाहर की नहीं मिली जिससे जीवन रंग नहीं ला पायी | अपनी मंजिल तक पहुँचने व समाज में आगे आकर कार्य करने का अवसर छूट गया।

जब 2020 में समूह के बारे में जानकारी मिली तो समूह से जुड़ने का ठान लिया और समूह से जुड़ गयी। न केवल समूह से जुड़ीं बल्कि अपनी तरह वंचित व आर्थिक रूप से जूझ रही महिलाओं को समूह से जोड़ने एवं उन्हें नयी राह दिखाने के लिए ‘समूह सखी’ के रूप में कार्य करने लगी। जब इन्हें प्रशिक्षण लेकर रोजगार के लिए जानकारी मिली तो इन्होने आरसेटी अहिरौली ,हरहुआ में प्रशिक्षक संजय कुमार सिंह द्वारा प्रशिक्षण लिया | प्रशिक्षण लेने से पहले ये जेम जेली सीखने गयी पर वहां जाकर इन्होने जब अलग- अलग प्रकार के स्वादिष्ट अचार बनाने की विधि देखी तो अपने दूरदृष्टि से अपना भविष्य भी देख लिया। आज यह अलग -अलग प्रकार के अचार व जेली बनाने के कार्य में अपने परिवार के साथ- साथ समूह की पांच महिलाओं किरन देवी,उर्मिला ,मीनू ,अनिता और पुष्पा को भी जोड़कर रोजगार दी। सभी की औसत मासिक आय चार से पांच हजार रुपये हो जा रही है और परिवार भी खुश है।समूह से इन्होने चार बार में अस्सी हजार ऋण लेकर अपने रोजगार को बढ़ाया है। इनकी ननद अनीता देवी व बेटी प्रगति मोदनवाल भी अचार ,जैम बनाने व बेचने तक में पूरी सहयोग करती हैं। *आम के आम गुठलियों के दाम* आम के गुठली तक से सिरका बनाकर तैयार करती हैं।

अम्मा जी अचारवाली दीदी विजयलक्ष्मी स्वावलम्बन व आत्मनिर्भरता की दिशा में आज बेहतर कार्य करते हुए लखपति दीदियों की श्रेणी में पहुँच गई हैं। इनकी टेस्टी अचार व जैम की चर्चा अधिकारियों में चर्चा का विषय बन गई है।बड़े-बड़े कार्यक्रमों में बड़े डिमांड तो वहीं नियमित घर पर सेवन करने वालों की संख्या इस तरह बढ़ गई है कि कई समूह की महिलाएं मिलकर गुणवत्तायुक्त अचार ,जैम बनाने में जुटी हैं। जहां उनके पास कल तक कोई काम नहीं था,आय के स्रोत नहीं थे आज विजयलक्ष्मी ने रोजगार के दरवाजे खोल दिये हैं महिलाये खुश है और अम्माजी अचारवाली दीदी के नाम से सोहरत पाकर स्वयं भी खुश हैं।

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