गंगा सप्तमी पर महामंडलेश्वर रूपोंमयी नंदगिरि माता जी के नेतृत्व में साधु सेवा, चादर व जलपान वितरण।

गंगा सप्तमी के पावन अवसर पर काशी पीठाधीश्वर, वीरेश्वर मठ एवं श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा की महामंडलेश्वर पूज्य रूपोंमयी नंदगिरि माता जी के कुशल नेतृत्व में एक भव्य एवं सेवा-प्रधान आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर हरिद्वार धाम में साधु-संतों को श्रद्धापूर्वक चादर एवं जलपान का वितरण किया गया। पूरे आयोजन का केंद्रबिंदु महामंडलेश्वर रूपोंमयी नंदगिरि माता जी का प्रेरणादायी व्यक्तित्व एवं उनकी सेवा भावना रही, जिसकी सराहना उपस्थित सभी श्रद्धालुओं एवं संतों ने की।

कार्यक्रम के दौरान महामंडलेश्वर पूज्य रूपोंमयी नंदगिरि माता जी ने गंगा सप्तमी के आध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिवस माँ गंगा के अवतरण का प्रतीक है, जो मानव जीवन के उद्धार का मार्ग प्रशस्त करती हैं। उन्होंने बताया कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवनरेखा हैं, जिनकी आराधना से आत्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। उनके उद्बोधन ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गहराई से प्रभावित किया और गंगा के प्रति आस्था को और सुदृढ़ किया।

महामंडलेश्वर जी ने विशेष रूप से साधु-संतों की सेवा को सर्वोच्च पुण्य कर्म बताते हुए कहा कि संत समाज धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं के संवाहक होते हैं। ऐसे में गंगा सप्तमी जैसे पावन पर्व पर उनकी सेवा करना अत्यंत फलदायी होता है। उन्होंने स्वयं साधुओं को चादर ओढ़ाकर एवं जलपान कराकर सेवा का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया, जिससे आयोजन का महत्व और अधिक बढ़ गया।

पूरे कार्यक्रम में महामंडलेश्वर रूपोंमयी नंदगिरि माता जी की गरिमामयी उपस्थिति एवं सक्रिय सहभागिता ने सभी को प्रेरित किया। उनकी सादगी, करुणा और सेवा भाव ने श्रद्धालुओं के हृदय में विशेष स्थान बनाया। आयोजन स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया।

इस अवसर पर महामंडलेश्वर जी ने गंगा की स्वच्छता एवं संरक्षण का संदेश देते हुए सभी से अपील की कि वे गंगा को प्रदूषण मुक्त रखने में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि गंगा की सेवा ही सच्ची श्रद्धा है और इसके संरक्षण में प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता आवश्यक है।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में सभी सहयोगियों एवं श्रद्धालुओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अंत में सभी ने माँ गंगा से विश्व कल्याण एवं सुख-समृद्धि की कामना की।

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