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चैतन्य योग सेवा संस्था में प्रोफेसर रामचंद्र भट्ट जी का प्रेरणादायी आगमन।

चैतन्य योग सेवा संस्था के लिए यह अत्यंत गौरव एवं सौभाग्य का अवसर रहा, जब प्रख्यात विद्वान प्रोफेसर रामचंद्र भट्ट का संस्था में पावन आगमन हुआ। वर्तमान में वे स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान के कुलपति के रूप में भारतीय ज्ञान परंपरा, योग, संस्कृति एवं संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु सतत कार्यरत हैं।

अपने प्रेरणादायी व्याख्यान में प्रोफेसर भट्ट जी ने भारतीय सनातन परंपरा, प्राचीन गुरुकुल शिक्षा प्रणाली तथा भारतीय दर्शन की महानता पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर केवल इतिहास का विषय नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के निर्माण का आधार है। गुरुकुल व्यवस्था केवल शिक्षा नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन, चरित्र निर्माण एवं जीवन मूल्यों की अनुपम परंपरा रही है, जिसे पुनः जीवित करना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने योग को भारतीय संस्कृति का प्राण बताते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक साधना नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति, मानसिक संतुलन और राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम है। उनके ओजस्वी एवं ज्ञानवर्धक उद्बोधन ने उपस्थित सभी श्रोताओं को अत्यंत प्रभावित किया।

चैतन्य योग सेवा संस्था ने उनके दिव्य ज्ञान, मार्गदर्शन एवं प्रेरणादायी विचारों के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया तथा उनके आगमन को संस्था के लिए ऐतिहासिक एवं अविस्मरणीय क्षण बताया।

चैतन्य योग सेवा संस्था के सचिव योगाचार्य आशीष आशीष टंडन, उपाध्यक्ष किशन मिश्रा, डॉ दिनेश चंद्र अरोड़ा, सष्ठी बोस एवं संस्था के अन्य सदस्यों ने संस्था में उनका स्वागत किया एवं आगमन के लिए उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया।

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