( जल की रक्षा सृष्टि की सुरक्षा )निरंकारी मिशन का सेवा और समर्पण से सशक्त जल संरक्षण का प्रेरक संकल्प

भक्ति केवल शब्दों से नही कर्मों में प्रकट हो। निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज

वाराणसी 22 फरवरी 2026 जल प्रकृति का अमूल्य उपहार है जीवन की आधारशिला और मानव सभ्यता की जीवनरेखा। जब यह जल स्वच्छ और संरक्षित रहता है। तो केवल पर्यावरण ही नहीं समाज का सामूहिक स्वास्थ्य और संतुलन भी सुदृढ़ होता है। इसी विचार को साकार रूप देते हुए प्राकृतिक जल स्रोतों नदियों तालाबों झीलों और समुद्री तटों की निस्वार्थ भाव से स्वच्छता एवं संरक्षण का व्यापक अभियान आज जन जन के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। यह पहल केवल सफाई तक सीमित नहीं, बल्कि जागरूकता, जिम्मेदारी और सामूहिक सहभागिता का सशक्त संदेश है।

स्वच्छ जल स्वच्छ मन अभियान के चौथे चरण का भव्य एवं प्रेरणास्पद आयोजन सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के मार्गदर्शन में भारतवर्ष के 25 राज्यों केन्द्रशासित प्रदेश के 930 शहरों के 1600 से अधिक स्थानों पर सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ जिसमें लगभग 12 लाख स्वयंसेवक सम्मिलित हुए। यह केवल एक पर्यावरणीय प्रयास नहीं बल्कि अध्यात्म सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व का अद्भुत समन्वय था जो जन जन के अंतर्मन को स्पर्श करते हुए जागरूकता एवं कर्तव्यबोध की भावना को और अधिक सुदृढ़ बनाता है।

संत निरंकारी मिशन की सामाजिक शाखा संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के तत्वावधान में बाबा हरदेव सिंह जी की अनेक शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हुए इस प्रोजेक्ट अमृत का आयोजन किया गया। जिसके तहत वाराणसी में गंगा के चौरासी घाटों पर हजारों भक्तों ने मिलकर सफाई किया। सफाई अभियान का शुभारंभ करते हुए वाराणसी ब्यापार मंडल के अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा ने मिशन के इस अभियान की प्रशंशा करते हुए कहा कि सभी को इस अभियान से प्रेरणा लेना चाहिए जिससे सभी के मनों में सफाई का भाव जागृत हो। अध्यक्ष का स्वागत जोनल इंचार्ज सिद्धार्थ शंकर ने किया।

विशेष सत्संग कार्यक्रम में सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने अपने अमृतमय प्रवचनों में फरमाया कि बाबा जी की शिक्षाएँ केवल स्मरण करने के लिए नहीं बल्कि जीवन में उतारने के लिए हैं। सतगुरु माता ने कहा कि सच्ची श्रद्धांजलि शब्दों से नहीं बल्कि कर्मों से दी जाती है। यदि हम स्वयं को उनके अनुयायी कहते हैं तो हमें आत्ममंथन करना होगा कि क्या हम वास्तव में प्रेम सेवा करुणा और समदृष्टि जैसे मानवीय गुणों को अपने जीवन में धारण कर रहे हैं। बाबा हरदेव सिंह महाराज का सम्पूर्ण जीवन मानव कल्याण को समर्पित रहा। उन्होंने सिखाया कि सेवा सुमिरन और सत्संग जीवन का आधार हैं। भक्ति केवल वाणी तक सीमित न रहे बल्कि व्यवहार में झलके यही उनका स्पष्ट संदेश था।

सत्संग में यह आह्वान किया गया कि प्रत्येक श्रद्धालु तन मन धन को निराकार की देन मानते हुए निष्कपट भाव से सेवा में जुड़े। जब सेवा स्वार्थरहित होती है तभी वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाती है। अंत में यही कामना की गई कि बाबा जी की शिक्षाएँ प्रत्येक हृदय में जीवित रहें और हेल्थ सिटी जैसे प्रकल्प मानवता की भलाई के नए आयाम स्थापित करें।

निःसंदेह स्वच्छ जल स्वच्छ मन का यह संदेश केवल एक अभियान नहीं बल्कि एक जीवन दर्शन है जो जल की धाराओं में निर्मलता स्थापित करने के साथ ही मन की गहराइयों में चेतना को आलोकित करता है। यही ऊर्जा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संतुलित सुरक्षित और शाश्वत भविष्य की आधारशिला बनाती है।

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