वाराणसी में गूंजा श्रीमद्भागवत कथा का रस

वाराणसी। सारनाथ बरईपुर स्थित बाबा नीम करौली आश्रम में श्री सनातन जागृति शक्तिपीठ ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित श्री नीम करौली बाबा के पांचवें स्थापना दिवस के पावन अवसर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा ने श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण निर्मित कर दिया। कथा के सातवें दिन कथा व्यास पूज्य पं० श्री आलोक कृष्ण जी महाराज ने श्रद्धालु श्रोताओं को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का रसपान कराया।अपने ओजस्वी प्रवचन में महाराज श्री ने पूतना राक्षसी के उद्धार की कथा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि “अविद्या (अज्ञान) ही पूतना है,जिससे काम उत्पन्न होता है। काम की पूर्ति न होने पर क्रोध जन्म लेता है,जो बुद्धि को भ्रष्ट कर देता है और अंततः व्यक्ति के पतन का कारण बनता है।” उन्होंने कहा कि इस अविद्या से मुक्ति पाने का एकमात्र उपाय सत्संग है। कथा के क्रम में उन्होंने शकटासुर वध,यमलार्जुन उद्धार,तृणावर्त वध,माखन चोरी,नंद बाबा के साथ ब्रजवास,गोचारण लीला,अघासुर एवं बकासुर वध,कालिया नाग का मानमर्दन तथा चीर हरण जैसी लीलाओं का अत्यंत सुंदर और विस्तारपूर्वक वर्णन किया। इन दिव्य कथाओं को सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भक्ति भाव में सराबोर हो उठे।कार्यक्रम स्थल पर भक्ति,श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए समुचित व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्त कथा का लाभ ले रहे हैं। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ कर रहा है,बल्कि समाज में आध्यात्मिक जागृति का भी संदेश दे रहा है।