
काशी की सांस्कृतिक आत्मा और भारत रत्न से सम्मानित शहनाई के जादूगर उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान जी की 110वीं जयंती के अवसर पर आज सिगरा स्थित फरमान दरगाह पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय दरगाह पहुंचकर उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान जी की मजार पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किए और उनके अद्वितीय योगदान को स्मरण किए।
इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा की उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान केवल एक महान शहनाई वादक और काशी की पहचान और गंगा-जमुनी तहज़ीब के जीवंत प्रतीक थे। उनकी शहनाई की मधुर धुनों ने काशी को पूरी दुनिया में एक अलग पहचान दिलाई उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान का काशी और माँ गंगा से गहरा आध्यात्मिक संबंध था। अक्सर वह गंगा किनारे बैठकर घंटों शहनाई का रियाज किया करते थे। उनकी साधना में काशी के घाटों की आध्यात्मिकता, मंदिरों की घंटियां और गंगा की लहरों की पवित्रता घुली हुई महसूस होती थी। बिस्मिल्लाह ख़ान साहब का संपूर्ण जीवन गंगा-जमुनी तहज़ीब को संजोने और उसे मजबूत करने में समर्पित रहा। उन्हें होली के रंग और ईद की खुशियों से समान लगाव था। वह होली और ईद दोनों पर्वों को पूरे उत्साह के साथ मनाते थे और सभी धर्मों में समान आस्था रखते थे। उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान एकता, भाईचारे और सद्भावना मिसाल थे। उनकी शहनाई की धुनें केवल संगीत नहीं थीं, बल्कि वह प्रेम, सौहार्द और इंसानियत का संदेश देती थीं। उन्होंने अपने जीवन और कला के माध्यम से यह साबित किया कि काशी की असली पहचान उसकी साझा संस्कृति, आपसी सम्मान और गंगा-जमुनी तहज़ीब में बसती है।उन्होंने अपने साधना के माध्यम से काशी की परंपरा,भारतीय संस्कृति की आत्मा को पूरी दुनिया तक पहुंचाया। उनके जीवन से भाईचारा प्रेम और सांस्कृतिक विरासत को संजोने की प्रेरणा मिलती है।

उपस्थित कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने भी उनकी मजार पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और काशी की इस महान विभूति को शत-शत नमन किया।
इस अवसर पर: प्रदेश अध्यक्ष अजय राय , महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ,सफक रिजवी,प्रिंस राय खगोलन, शकील जादूगर, विश्वनाथ कुँवर, किशन यादव समेत कई लोग उपस्थित रहे।