वाराणसी स्थित स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज में आयोजित इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश से आए विद्वानों शिक्षाविदों और शोधार्थियों की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली।

सम्मेलन का मुख्य विषय आध्यात्मिकता, वैश्विक कल्याण और डिजिटल सजगता जैसे समकालीन मुद्दों पर केंद्रित है।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि आध्यात्मिकता किसी एक धर्म या परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन का एक मूलभूत आयाम है।

उन्होंने कहा कि आज के वैश्विक संकटों के दौर में भारत ने जिस प्रकार संतुलित विकास का मार्ग प्रस्तुत किया है, वह पूरे विश्व के लिए प्रेरणादायक है।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रो. विक्रम सिंह ने युवाओं से जीवन में अनुशासन, संतुलन और आध्यात्मिक दृष्टि अपनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि सफलता के लिए समय का सदुपयोग और लक्ष्य के प्रति समर्पण अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित प्रो. गिरिश्वर मिश्रा, पूर्व कुलपति, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय ने कहा कि आज की दुनिया तेजी से अस्थिर होती जा रही है। ऐसे समय में वैश्विक कल्याण, सतत विकास और डिजिटल सजगता जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति प्रेम, सह-अस्तित्व और संवेदनशीलता की भावना को बढ़ावा देती है। वहीं संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने भारतीय परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों की गहराई पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान और करुणा के निरंतर प्रवाह की संस्कृति है।

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए एसएमएस वाराणसी के निदेशक प्रो. पी. एन. झा ने कहा कि संस्थान केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को लेकर भी सदैव प्रतिबद्ध रहा है।

इस अवसर पर सम्मेलन विषय पर आधारित स्मारिका का विमोचन भी किया गया तथा पिछले वर्ष आयोजित बारहवें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन पर आधारित पुस्तक का भी अनावरण किया गया।

सम्मेलन के पहले दिन विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन हुआ, जिसमें देश-विदेश से आए लगभग 300 से अधिक प्रतिभागियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए।

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