
श्री अग्रसेन कन्या पी.जी. कॉलेज, वाराणसी में दिनांक 27.4.2026 को प्राचीन भारतीय इतिहास पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग द्वारा सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो मिथिलेश सिंह ने की। उन्होंने सभी को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के विषय में जानकारी देते हुए कहा कि दिनांक 8 से 11 जनवरी 2026 को गुजरात के सोमनाथ में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का भव्य आयोजन किया गया जो सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनवी द्वारा किए गए प्रथम आक्रमण के 1000 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में मनाया गया। यह पर्व भारतीय अस्तित्व एवं स्वाभिमान के 1000 वर्षों के संघर्ष का प्रतीक है। प्राचीन भारतीय इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो दुष्यंत सिंह ने सोमनाथ मंदिर की ऐतिहासिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुजरात तट के प्रभास पाटन पर स्थित सोमनाथ मंदिर 12 पवित्र शिव ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह वह स्थान भी है जहां से श्री कृष्ण ने अपनी अंतिम यात्रा प्रारंभ की थी। जब 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी ने इस मंदिर को विध्वंस कर दिया था तब सोलंकी राजा भीमदेव ने प्रस्तर से इस मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था इसलिए यह मंदिर कट्टरता पर आस्था, विनाश पर सृजन तथा भारतीय संस्कृति की शाश्वतता का प्रतीक है। प्राचीन इतिहास विभाग में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ सरला सिंह ने इस मंदिर के सांस्कृतिक तथा बौद्धिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मंदिर नागर शैली का एक प्रमुख उदाहरण है। इस मंदिर को न जाने कितनी बार नष्ट किया गया और लूटा गया फिर भी यह मंदिर अपने अस्तित्व को बनाए रखने में सफल रहा तथा आज हम सभी को अपनी ऐतिहासिकता की मौन गवाही दे रहा है। अधिष्ठाता शैक्षणिक डॉ अपर्णा शुक्ला द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रो मृदुला व्यास, श्रीमती दिव्या पाल,डॉ सुमन सिंह, डॉ मेनका सिंह, डॉ अंजलि त्यागी इत्यादि अनेक प्रवक्तागण तथा छात्राएं उपस्थित रही।