
चार्ज संभालते ही डीएम इंद्रजीत सिंह ने साफ संकेत दे दिया है कि लापरवाही अब सीधे कार्रवाई तक पहुंचेगी।
सोचिए… जिन मामलों में जनता चक्कर काटती रही, वो फाइलें आखिर किस “आराम” में थीं?
अब कई दफ्तरों में कुर्सियों से ज्यादा फाइलें कांप रही हैं… क्योंकि लंबे समय से जमे कर्मचारियों को पहली बार लग रहा है कि काम भी पूछे जाएंगे।
जनता को अफसर नहीं, जवाबदेह प्रशासन चाहिए… और फिलहाल सुल्तानपुर में उसकी शुरुआत दिख रही है।
वही अंगद की तरह से सालों से एक ही पटल पर जनता का खून चूसने वाले कर्मचारियों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती है कही इस बार उनका नम्बर तो नहीं..