सुल्तानपुर में कार्रवाई बनाम हकीकत की लड़ाई

सुल्तानपुर नगर पालिका द्वारा चलाया जा रहा अतिक्रमण हटाओ अभियान अब खुद सवालों के घेरे में आता नजर आ रहा है। शहर में कभी अचानक तेज़ी से चलने वाली कार्रवाई, तो कभी उसी जगह कुछ ही दिनों में दोबारा फैलता अतिक्रमण—यह तस्वीर आम जनता के मन में एक ही सवाल छोड़ रही है कि क्या अभियान सिर्फ दिखावे तक सीमित है?
प्रशासन की मंशा पर उंगली उठाना शायद जल्दबाज़ी हो, लेकिन कार्रवाई के बाद की निगरानी और स्थायित्व जरूर कटघरे में है। ज़मीनी सच्चाई यही बता रही है कि हटाया गया अतिक्रमण, थोड़े अंतराल के बाद फिर उसी अंदाज़ में लौट आता है।
चौक क्षेत्र: कार्रवाई के बाद फिर वही कहानी
चौक इलाके में हाल ही में अतिक्रमण हटाने के दौरान कई दुकानदारों के चालान काटे गए, सख़्ती भी दिखाई गई। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि
कुछ ही दिनों में सड़क पर फिर से सामान सज गया
नालियों पर अस्थायी कब्ज़े दोबारा जम गए
ऐसे में सवाल लाज़मी है—
क्या कार्रवाई के बाद कोई देखने वाला भी है?
या फिर अतिक्रमण हटाओ अभियान “आओ–जाओ” की रस्म बनकर रह गया है?
सब्ज़ी मंडी क्षेत्र: सार्वजनिक संपत्ति भी असुरक्षित
सब्ज़ी मंडी इलाके में लगे लोहे के डिवाइडर के टूटने और कुछ हिस्सों के गायब होने की जानकारी सामने आना चिंता बढ़ाने वाला है।
यह मामला सिर्फ अव्यवस्था का नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा है।
फिलहाल किसी पर आरोप लगाना उचित नहीं, लेकिन यह सवाल जरूर उठता है कि—
डिवाइडर कैसे गायब हुए?
निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी?
यह घटना साफ इशारा करती है कि सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं।
जाम का झाम: एम्बुलेंस भी फंसी
अतिक्रमण का सबसे बड़ा खामियाजा भुगत रहा है आम नागरिक।
सब्जी मंडी , अस्पताल लोड क्षेत्र में लगने वाले जाम की वजह से—
एम्बुलेंस और आपात सेवाएं अटक जाती हैं
पैदल चलना भी जोखिम भरा हो जाता है
सड़क किनारे फैला अतिक्रमण, नालियों पर कब्ज़ा और अव्यवस्थित ठेले—ये सब मिलकर शहर की रफ्तार थाम रहे हैं।
समन्वय की कमी या जिम्मेदारी से बचाव?
खोजी पड़ताल में साफ होता है कि यह समस्या सिर्फ नगर पालिका की नहीं।
यहां ज़रूरत है—
नगर पालिका
यातायात विभाग
स्थानीय पुलिस
चौकी स्तर के अमले
के बीच ठोस और रोज़ाना समन्वय की।
कार्रवाई के बाद अगर दोबारा कब्ज़ा हो रहा है, तो जवाबदेही तय होनी ही चाहिए।
स्थायी समाधान या सिर्फ तात्कालिक तमाशा?
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों की मानें तो समाधान साफ हैं—
अतिक्रमण हटाने के बाद नियमित निरीक्षण
संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी और गश्त
दोबारा कब्ज़ा करने वालों पर तुरंत कड़ी कार्रवाई
जिम्मेदार अधिकारियों की स्पष्ट जवाबदेही
जब तक कार्रवाई निरंतर, निष्पक्ष और सख़्त नहीं होगी, तब तक अतिक्रमण की जड़ें उखड़ना मुश्किल है। अगर पुलिस प्रशासन अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए अतिक्रमण कार्यों पर कार्यवाही करें दुकान के बाहर पटरी पर कब्जा करने से रोके तो अतिक्रमण को खत्म किया जा सकता है परंतु वह अपने कर्तव्य से भी विमुख रहते हैं और नगर पालिका के ऊपर पूरा दोषोरोपण करते हैं कि यह नगर पालिका की जिम्मेदारी है यह पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है
अब सवाल सीधा है—
क्या अतिक्रमण हटाओ अभियान स्थायी समाधान बनेगा,
या फिर हर कुछ दिनों में लगने वाला प्रशासनिक शो बनकर रह जाएगा?
नज़रें अब प्रशासन की अगली चाल पर टिकी हैं।
सदर विधायक विनोद सिंह ने प्रेस मीटिंग में कहा था कि वह इस अतिक्रमण को रोकने के लिए और जाम को खत्म करने के लिए 10000 बच्चों के साथ सड़क पर उतरेंगे उनका कहना है कि अधिकारी लोग उनकी बातें सुनते नहीं है तो इसलिए वह यह कदम उठाने के लिए मजबूर हो गए हैं।
अधिशासी अभियंता नगर पालिका लालचंद सरोज का कहना है कि पथ दुकानदारों व ठेलो वालों को वेंडिंग जोन में भेजने तथा अतिक्रमण को समाप्त करने तक यह अभियान चलता रहेगा इससे हमारा सुल्तानपुर स्वच्छ और सुंदर बन जाएगा ।


