
वाराणसी। दवा विक्रेता समिति,वाराणसी ने औषधि विक्रय प्रतिष्ठानों को जारी कारण बताओ नोटिसों के संबंध में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन से न्यायोचित एवं सहानुभूतिपूर्ण कार्यवाही किए जाने की मांग की है। समिति ने इस संबंध में आयुक्त,खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन,उत्तर प्रदेश तथा सहायक आयुक्त (औषधि),वाराणसी मंडल को प्रतिनिधित्व भेजकर वास्तविक एवं वर्षों से संचालित औषधि प्रतिष्ठानों को राहत प्रदान करने का अनुरोध किया है। समिति के अध्यक्ष दिवाकर सिंह एवं उत्तर प्रदेश संगठन के महामंत्री सुधीर अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश स्तर पर कोडीन युक्त औषधियों के दुरुपयोग की रोकथाम तथा फर्जी,अस्तित्वहीन एवं गैर-संचालित औषधि प्रतिष्ठानों के सत्यापन के उद्देश्य से विशेष अभियान चलाया गया था। निरीक्षण के दौरान जिन प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, वे सभी अपने लाइसेंस प्राप्त पते पर वर्षों से संचालित पाए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि संबंधित प्रतिष्ठान न तो फर्जी हैं और न ही गैर-संचालित।प्रतिनिधित्व में उल्लेख किया गया है कि निरीक्षण रिपोर्ट में कहीं भी नकली,जाली,प्रतिबंधित,एक्सपायर्ड अथवा बिना स्रोत की औषधियों के पाए जाने का उल्लेख नहीं है। अधिकांश आपत्तियां अभिलेखीय, प्रक्रियागत अथवा तकनीकी प्रकृति की हैं, जिन्हें निर्धारित समय में दूर किया जा सकता है। समिति ने यह भी कहा कि जिन प्रतिष्ठानों के संबंध में क्षेत्रफल अथवा किरायानामा संबंधी आपत्तियां उठाई गई हैं,वे लंबे समय से विभाग द्वारा प्रदत्त वैध अनुज्ञप्ति के अंतर्गत संचालित हैं तथा समय-समय पर उनका नवीनीकरण भी होता रहा है। ऐसे में वर्षों बाद केवल तकनीकी अथवा अभिलेखीय कमियों के आधार पर कठोर कार्रवाई किया जाना उचित नहीं होगा। दवा विक्रेता समिति ने प्रशासन को आश्वस्त किया कि वह फर्जी, अवैध एवं गैर-संचालित औषधि प्रतिष्ठानों के विरुद्ध चलाए जाने वाले अभियानों का सदैव समर्थन करती रही है और भविष्य में भी पूरा सहयोग प्रदान करेगी। समिति ने आग्रह किया कि संबंधित प्रतिष्ठानों को आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने तथा कमियों के निराकरण का अवसर दिया जाए तथा अनुज्ञप्ति निलंबन अथवा निरस्तीकरण जैसी कठोर कार्रवाई से परहेज किया जाए।समिति को आशा है कि विभाग सत्यापन अभियान के मूल उद्देश्य,वास्तविक तथ्यों तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए न्यायसंगत निर्णय करेगा।