वाराणसी में श्री नीम करौली बाबा के स्थापना दिवस पर गूंजा भागवत संदेश—विज्ञान के साथ नैतिकता भी जरूरी।

वाराणसी। नीम करौली बाबा के पावन सानिध्य से प्रेरित श्री शक्तिपीठ पीठाधीश्वरी धाम आश्रम,बरईपुर (सारनाथ) में श्री सनातन जागृति शक्तिपीठ ट्रस्ट के तत्वावधान में पांचवें स्थापना दिवस के अवसर पर भव्य श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिन कथा व्यास पूज्य पं. श्री आलोक कृष्ण जी महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन के गूढ़ आध्यात्मिक और सामाजिक संदेशों से अभिभूत कर दिया। महाराज श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि आज मानव ने विज्ञान के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है, किन्तु नैतिक मूल्यों का ह्रास भी उतनी ही तेजी से हुआ है। यही कारण है कि परिवारों में कलह, समाज में अशांति और संबंधों में दरारें बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने मार्मिक शब्दों में कहा कि माता-पिता वृद्धाश्रमों में जाने को विवश हैं,भाई-भाई के बीच दूरी बढ़ रही है और पति-पत्नी के रिश्तों में भी तनाव का वातावरण बन गया है। कथा के दौरान उन्होंने भागवत माहात्म्य की प्रसिद्ध कथा—आत्मदेव,धुंधकारी और गोकर्ण प्रसंग को विशेष रूप से प्रासंगिक बताते हुए कहा कि धुंधकारी द्वारा माता-पिता का अपमान और प्रताड़ना ही उसके प्रेतत्व का कारण बनी,जबकि गोकर्ण का आत्मानुशासन और मातृ-पितृ भक्ति उसे सम्मान और आत्मोन्नति की ओर ले जाती है। यह पावन कथा न केवल आध्यात्मिक उन्नयन का माध्यम है,बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना का भी संदेश देती है। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर कथा श्रवण कर रहे हैं और भक्ति भाव में सराबोर हो रहे हैं। इस दिव्य आयोजन के माध्यम से समाज को एक बार फिर यह संदेश दिया जा रहा है कि जीवन में सच्ची प्रगति तभी संभव है,जब विज्ञान के साथ-साथ संस्कार और नैतिकता का संतुलन बना रहे।

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