श्री नीम करौली बाबा के स्थापना दिवस पर श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य आयोजन, तीसरे दिन श्रद्धालुओं को मिला जीवन सुधार का संदेश।

वाराणसी। बरईपुर-सारनाथ श्री सनातन जागृति शक्तिपीठ ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री शक्तिपीठ पीठाधीश्वरी धाम,बाबा नीम करौली आश्रम,बरईपुर (सारनाथ) में श्री नीम करौली बाबा के पांचवें स्थापना दिवस के पावन अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन निरंतर श्रद्धा और भक्ति के साथ जारी है। कथा के तीसरे दिन कथा व्यास पूज्य पं. श्री आलोक कृष्ण जी महाराज ने श्रद्धालु श्रोताओं को दिव्य कथामृत का रसपान कराया। अपने प्रवचन में महाराज श्री ने शुकताल क्षेत्र में गंगा तट पर विराजमान राजर्षि परीक्षित और परमहंस श्री शुकदेव जी के संवाद का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि मरणासन्न व्यक्ति के लिए जीवन को सार्थक बनाने और भगवान की शीघ्र प्राप्ति हेतु क्या मार्ग अपनाना चाहिए—इस विषय पर परीक्षित द्वारा पूछे गए प्रश्नों और शुकदेव जी के उत्तर आज भी मानव जीवन के लिए अत्यंत प्रेरणादायक हैं। महाराज श्री ने कहा कि संसार का सामान्य जीव रात को निद्रा और भोग-विलास में तथा दिनभर धनार्जन और परिवार के भरण-पोषण में व्यस्त रहकर मृत्यु के सत्य को भूल जाता है। यही कारण है कि वह भगवत भजन से वंचित रह जाता है और अंततः अधोगति को प्राप्त होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मृत्यु को सुधारने के लिए सांसारिक कार्यों का त्याग कर वन में जाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करते हुए मन को भगवान गोविंद के चरणों में समर्पित करना ही सच्चा मार्ग है। उन्होंने श्रीकृष्ण की मुरली का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे मुरली सदैव मधुर स्वर में गूंजती है, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने वचन मधुर और सत्य रखने चाहिए। मधुर वाणी से परिवार और समाज में सद्भाव बना रहता है, जबकि कटु वचन विघटन का कारण बनते हैं। इसलिए हमें सदैव “सत्यमेव जयते” के सिद्धांत पर चलते हुए मधुर सत्य बोलना चाहिए। इस दिव्य आयोजन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर कथा का लाभ ले रहे हैं और भक्ति रस में सराबोर हो रहे हैं। आयोजन स्थल पर आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बना हुआ है।

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