
वाराणसी, 21 मई देश के सबसे युवा पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न स्वर्गीय राजीव गांधी जी देश में हुई संचार क्रांति के जनक और देश को इक्सवीं सदी में ले जाने वाले एक महानतम दूरदर्शी जन नेता थे जिनके यशस्वी कृत्य को
देश दिर्घ काल तक
याद करता रहेगा।
उक्त विचार आज इंग्लिशिया लाइन स्थित पंडित कमलापति त्रिपाठी फाउंडेशन के कार्यालय में स्वर्गीय राजीव गांधी जी के 36 वीं पुण्य तिथि पर आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं द्वारा व्यक्त करते हुए आगे कहा गया कि स्वर्गीय राजीव गांधी भारत की राजनीति के एक ऐसे ध्रुव तारा थे, जिन्हों ने अपने छोटे से राजनैतिक जीवन के छोटे से शासनकाल में जहां संचार क्रांति की शुरुआत करा करके देश को विशेष रूप से देश के युवावों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का अद्भुत अवसर प्रदान कराया तो वहीं ईमानदार और मूल्य परक राजनीति करते हुए कुछ अपनों से धोखे खाने के बावजूद भी उन्होंने भारत को 21वीं सदी में ले जाने का अपना ध्रुव संकल्प कभी नहीं छोड़ा । सत्ता में रहते हुए और सत्ता से बाहर रहने के बाद भी उन्होंने राजनीतिक शुचिता, पवित्रता और मर्यादाओं का हमेशा ध्यान रख्खा। यद्यपि इस कालखंड में कुछ ऐसे मौकापरस्त लोग भी रहे जो अपने निहित स्वार्थ के चलते राजीव जी को बदनाम करने से भी बाज नहीं आए थे, जिनको राजीव जी के ही चलते बहुत कुछ मिला भी था, इन सब तमाम झंझावातों के बावजूद भी वे दृढ़ संकल्प के साथ सत्यपथ पर हमेशा अविचल भाव से चलते रहे , राजीव गांधी जी का छोटा सा राजनीतिक जीवन अनेक उतार चढ़ाव, उथल पथल और संघर्षों से होता हुआ अंततः देश की एकता अखन्डता की रक्षा के लिये बलिदान हो गया। वे सच्चे अर्थों में मां भारती के ऐसे महानतम सपूत थे जिन्हों ने ना चाहते हुए भी राजनीति की दुनिया में कदम अवश्य रख्खा था पर अपने से छोटे से कार्यकाल में भी उन्होंने भारतीय राजनीति पर जो अमिट छाप छोड़ा उसे इतिहास कभीं भुला नहीं पाएगा।
ये और बात है आज की सत्ता में बैठे कुछ बौने कद के छुद्र मानसिकता वाले लोग उनकी राजनैतिक उंचाई को चाह कर भी जब कभीं नहीं छू पाते तो ईर्ष्या बस अनाप शनाप बातें जरूर बनाते दिखते हैं।
ऐसे महामानव राष्ट्र रत्न स्वर्गीय राजीव गांधी को उनकी 36 वीं पावन पुण्य तिथि पर हम सब आदर सहित श्रद्धानत हैं, और उन्हे कोटि-कोटि नमन करते हैं , विचार गोष्ठी के प्रारंभ में राजीव जी के चित्र पर पुष्पाजंलि अर्पित की गई ।
विचार गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ नेता पंडित विजय शंकर पांडे ने संचालन बैजनाथ सिंह ने किया और विचार गोष्ठी में प्रमुख रूप राधेलाल एडवोकेट, आनन्द सिंह,विजय कृष्ण राय अन्नू, आनन्द मिश्रा,भूपेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट, मनोज चौबे, महेंद्र सिंह चौहान , विवेक सिंह एडवोकेट,डाक्टर उमापति उपाध्याय,पुनीतमिश्रा,एडवोकेट पंकजमिश्रा,सुशीलसोनकर,बह्मदेव मिश्रा ईलाका गुरू, राजेन्द्र प्रसाद जायसवाल, कमलाकांत पांडे, युवराज पान्डेय अशोक कुमार पांडे, निशान्त ओझा , सुवाष राम, मोहम्मद अरशद, पिंटू शेख आदि लोगों ने प्रमुख रूप से अपने विचार प्रकट किये।