संत साइ औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र शिवराज नगर में औषधि उद्यान:

औद्योनिक प्रकोष्ठ सहकार भारती प्रदेश के तत्वाधान में माह पर्यंत चल रहे आयुष जागरण महोत्सव के अंतर्गत आज अपने छठे पडाव के अधीन महमूरगंज स्थित संत साइ औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र शिवराज नगर में औषधि उद्यान: समस्याओं का समाधान विषयक कार्यशाला एवं एवं भारत का राष्ट्रीय संस्कार सहकारिता विषयक गोष्टी लोक अदालत न्यायाधीश अच्छे लाल गुप्ता की अध्यक्षता एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी क्षेत्र कारवाह डॉ वीरेंद्र जायसवाल के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुई। कार्यशाला का नेतृत्व काशी हिंदू विश्वविद्यालय आयुर्वेद विभाग के प्रोफेसर प्रेमशंकरपांडे ने किया।
औषधि उद्यान: समस्या समाधान विषय पर आयोजित कार्यशाला में 100 से अधिक बालकों एवं 26 शिक्षकों ने भाग लिया कार्यशाला में बालकों को विभिन्न प्रकार की औषधि एवं उनके पौधों की जानकारी दी गई उनके गुण दोष का वर्णन किया गया विभिन्न प्रकार के औषधि पौधों के लिए उचित वातावरण, तथा इन सभी का स्वास्थ्य समस्या के समाधान का क्या तरीका होगा इसे विस्तारित रूप से बताया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बताया कि भारत की रसोई में मिलने वाले मसाले औषधीय गुण से युक्त हैं और इनका प्रयोग कर हम अपनी समस्या का समाधान कर सकते हैं। डॉक्टर पांडे ने कहा कि हमारे ही औषधिय पौधों का रस निकालकर उसकी दवा बनाकर हमें ही अंग्रेजी दवा कंपनियां उसे बेच रहे हैं इन औषधि पौधों की प्रॉपर्टी को जब हम गर्म करके प्रयोग करते हैं तो उसका गुण पहले से आधा रह जाता है। अजवाइन मेथी दालचीनी पुदीना धनिया लहसुन हम अपने घर की वाटिका में भी तैयार कर सकते हैं विद्यालयों में औषधि वाटिका का निर्माण कर बालकों में इन औषधीय की न केवल जानकारी दी जानी चाहिए बल्कि इसे अध्ययन का विषय भी बनाया जाना चाहिए बालकों को पौधों का परिचय कराने के बाद विभिन्न पौधे का विभिन्न रोगों में होने वाले लाभ के संबंध में डॉक्टर पांडे ने प्रयोग द्वारा बालकों को जागृतकिया।
मुख्य अतिथि डॉ वीरेंद्र जायसवाल क्षेत्र कारवाह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि अंग्रेज नहीं होते तो बहुत सी उपलब्धियां और जानकारियां नहीं होती किंतु मैं उनसे पूछता हूं किंतु मैं उनसे पूछता हूं कि जब अंग्रेज नहीं थे तब क्या उपलब्धियां और जानकारियां नहीं थी चरक और सुश्रुत को क्या अंग्रेज लाए थे। क्या लोग बीमार नहीं पढ़ते थे या उनका इलाज नहीं होता था। हमारे यहां 12 महीने में चार मौसम और 6 रितु होते हैं प्रकृति की कृपा से हमें भोजन और स्वास्थ्य की चिंता नहीं करनी है हमारे देश की ऋतुये हमारा शोधन करती रहती है हमें धर्म को अंगीकार कर अपनी समस्याओं का हाल खोजना चाहिए धर्म पर चलते हुए ना हमें पुलिस की जरूरत है ना ही जज की हमारा धर्म सहकारिता से संस्कारित है सहकारिता हमारी रक्त में रचा बसा है अत्याचार रूपी रावण को समाप्त करने के लिए भगवान राम ने गजब की सहकारिता का उदाहरण प्रस्तुत किया है वन्य जीवों को लेकर जो सहकार प्रस्तुत किया वह अद्भुत है। 12000 से 17000 साल पहले 36 मिल लंबा और पांच मील चौड़ा पुल वन्यजीवों की मदद से 5 दिन में ही तैयार हो गया जो आज भी मानव जीवन के पास आश्चर्य निर्मित उदाहरण है हमारी उपज के 36 हिस्से होते थे और समाज के सभी लोगों को अपना-अपना अंशदान यही से प्राप्त करते थे तब का हम अब मैं में बदल गया है इसलिए आज सहकारिता की सर्वाधिक आवश्यकता है।
विषय प्रवर्तन करते हुए उत्तर प्रदेश औद्योनिक प्रकोष्ठ प्रमुख डॉक्टर विश्वनाथ दुबे ने कहा कि दुनिया में जितनी भी मेडिकल पैथी हैं उनका आधार औषधि वृक्ष और पौधे ही हैं। देवताओं को चढ़ने वाली फल फूल पूर्णतया औषधि है भगवान गणेश को चढ़ाने वाला दूव मां दुर्गा को चढ़ाने वाला अड़हुल भगवान शिव को अर्पित होने वाला बेलपत्र सहित समस्त चढ़ाए जाने वाली फूलों की किस्म और पत्तियां अपनी औषधि गुण के कारण जानी जाती है तुलसी परिजाता देवताओं को भी चढ़ाए जाने वाले दुर्लभ पौधे है नीम तुलसी पारिजात मीठी नीम लहसुन पुदीना आदी दादी की औषधि के रूप में जाने जाते रहे हैं हमने अपनी वस्तुओं को अपेक्षा कर अपना ही नुकसान किया है। कोरोना कल में इसे सिद्ध भी किया है
अध्यक्ष पद से बोलते हुए न्यायाधीश लोक अदालत से अच्छे लाल गुप्तने कहा कि एक सबके लिए और सबके लिए वाक्य हमारे लिए अनुसरण करने योग्य है सहकारिता के मार्ग पर चलकर हम समाज को नई दिशा दे सकते हैं।
कार्यक्रम के संयोजक औद्योगिक प्रकोष्ठ महानगर वाराणसी के संयोजक एवं संत साइं शिक्षण संस्थान के डायरेक्टर अविनाश चंद सिंह स्वागत किया महानगर अध्यक्ष नूरुल हसन ने अपने विचार व्यक्त किया। इस सॉफ्टवेयर पर श्रीमती रितिका दुबे एसएन सिंह यादव आशीष सिंह अमितसिंह अर्चना सिंह संजू पटेल प्रवीण सिंह सीमा अग्रवाल एवं एवं विश्वनाथ अग्रवाल को उनके कार्यों के लिए पुरस्कृत किया गया बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी इस कार्यक्रम में हिस्सेदारी की। दुर्गेश मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापित किया
इस अवसर पर आनंद क्रिकेट अकादमी एपीपी आनंद के नेतृत्व में आयुष जागरण महोत्सव के अंतर्गत विद्यालयों में औषधि वाटिका के निर्माण का संकल्प लिया गया तथा 25 बालकों को औषधि मित्र के रूप में घोषित किया गया।
भारी संख्या में उपस्थित लोगों ने अपने अपने घरों पर कम से कम दो औषधि पौधों को लगाने का संकल्प लिया।

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