img 20250727 wa0084

चोरी और जेब काटने एवं सट्टा खिलाने वाली शातिर अलीशा अंसारी ने सौतेली बहन फिरदौस परवीन का कैसे रूप धारण किया।

कानपुर नगर थाना जूही से मुकदमा अपराध संख्या,137/2016,/धारा,380,411 का

चोरी के दर्ज मुकदमे को छुपाकर बार काउंसिल को झूठा शपथ पत्र देकर छल कपट कर लाइसेंस को प्राप्त किया

\"\"

शातिर महिला अलीशा अंसारी ने बार काउंसिल से जारी लाइसेंस का उपयोग किन-किन अपराधिक कार्य में किया

 

 

कानपुर थाना जूही से दर्ज मुकदमे को खत्म करने में काले कोर्ट का सहारा लिया वादी मुकदमे से झूठी गवाही दिलाई कोर्ट ने खत्म करने से इनकार किया

 

कानपुर नगर थाना नजीराबाद से अलीशा अंसारी अनैतिक व्यापार में पकड़ी गई मुकदमा अपराध संख्या,71/2023 सरकार बनाम मरियम के नाम दर्ज हुआ थानेदार से सेटिंग बिल्हौर तहसील की हेरा फेरी का लाभ लेकर एक महिला सोनम सविता के नाम के आगे उर्फ़ अक्सा अंसारी लगाकर बच निकली

 

शातिर महिला द्वारा इतना बड़ा फर्जी वाड़ा उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशासन द्वारा कार्यवाही योगी जी के राज्य में नहीं कौन दे रहा है दो दो नाम का रूप धारण करने वाली महिला को संरक्षण

 

 

 

1.सन,2017 कानपुर नगर बिल्हौर तहसील से अलीशा ने अपने आधार कार्ड, संख्या ,601690548437 में फर्जी दस्तावेजों व कूटरचित प्रमाण पत्र के माध्यम से सौतेली बहन फिरदौस परवीन उर्फ अलीशा अंसारी दो नामो को जोड़कर एक आईडी को जारी कराया।

 

2.सन,2016 मे हीरालाल यादव लॉ कॉलेज सरोजिनी नगर कानपुर रोड लखनऊ, अलॉटमेंट नंबर,025557/2016 की लॉ की सौतेली बहन फिरदौस परवीन की डिग्री में आधार कार्ड में अंकित दो नामो का लाभ लेकर फर्जी तरीके से अलीशा अंसारी ने अपना फोटो लगाया।

 

सांप मरा और लाठी भी नहीं टूटी।

 

उन्नाव कोर्ट के माननीय सीजेएम में दाखिल वाद के वकालतनामा और रजिस्ट्रेशन की फर्जी मोहर व पहचान पत्र अलीशा अंसारी का प्रयोग ने फर्जीवाड़े की पोल खोल दी।

 

 

 

एक कहावत है चोर चोरी जितना करें पर सबूत कुछ न कुछ छोड़ जाता है।

 

 

भारत सरकार से जारी पहचान पत्र व आधार कार्ड के नामो के अलग-अलग अंतर पर अलीशा अंसारी का झूठ से उठा पर्दा

 

1,अलीशा

2, अलीशा अंसारी और फिरदौस परवीन

 

बार कौंसिल से जारी लाइसेंस में फिरदौस परवीन अंकित।

 

1,अलीशा जिसका कार्य जेब काटना और सोने की दुकान से चोरी,अनैतिक व्यापार व देह व्यापार के अपराधिक कार्य को अंजाम देना और उन्नाव कोर्ट से झूठे वाद निर्दोषों पर 376,354,379,392 IPC के दर्ज कराना।

 

2, दर्ज कराए मुकदमे को वापस लेने के नाम से अलीशा अंसारी खुद ही फर्जी अधिवक्ता फिरदौस परवीन बन धन की मोटी उगाई करना।

 

उन्नाव कोर्ट के माननीय न्यायालय सीजेएम के दाखिल वाद में वादिनी अलीशा अंसारी बनी और बार काउंसिल उत्तर प्रदेश से लाइसेंस जारी होने के 4 माह पहले खुद ही फिरदौस परवीन अधिवक्ता बनकर वकालतनामा और रजिस्ट्रेशन,1364/2020 में फर्जी मोहर लगाई मामले से जिम्मेदार मौन।

 

 

उन्नाव कोर्ट के दाखिल वाद में वकालतनामा और मोहर में आलीशा अंसारी और फिरदौस परवीन दो नामो का इस्तेमाल जिम्मेदार कौन।

 

किए गए जुर्म को छुपा कर शातिर अलीशा अंसारी ने ओढा सौतेली बहन फिरदौस परवीन का नकाब।

 

 

आरोपों की जांच:

 

इस मामले में जांच के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:

 

दस्तावेजों की जांच: अलीशा अंसारी और फिरदौस परवीन द्वारा उपयोग किए गए दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए।

 

मोबाइल फोन की सीडीआर: अलीशा अंसारी और फिरदौस परवीन द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल फोन की सीडीआर की जांच करनी चाहिए और यह पता लगाना चाहिए कि वे किन लोगों के साथ संपर्क में थीं।

 

गैंग में शामिल लोगों की जांच: अलीशा अंसारी और फिरदौस परवीन के गैंग में शामिल लोगों की जांच करनी चाहिए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।

 

कार्यवाही का उदाहरण

 

 

उपरोक्त मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया और बार काउंसिल उत्तर प्रदेश को तत्काल प्रभाव से महिला के जारी लाइसेंस को निरस्त करना चाहिए और आवश्यक कदम उठाने चाहिए। इसके अलावा, यह भी पता लगाना चाहिए कि महिला ने जारी डिग्री का किन-किन कामों में प्रयोग कर दुरुपयोग किया है।और बार काउंसिल प्रयागराज को आवेदन के समय दिए फिरदौस परवीन के सभी दस्तावेजों की गहन जांच कर आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लानी चाहिए। उन्नाव पुलिस अधीक्षक को उपरोक्त महिला और उसके गैंग की निष्पक्षता से गहन जांच करनी चाहिए और कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लानी चाहिए।

 

निष्कर्ष:

 

यह मामला बहुत गंभीर है और इसकी जांच करना आवश्यक है अलीशा अंसारी और फिरदौस परवीन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।यह मामला केवल एक महिला के अपराध व फर्जी विधिक व्यवसाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे कुछ शातिर लोग कानून की आड़ में अपराध करते हैं।उन्नाव पुलिस अधीक्षक को तत्काल प्रभाव से इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए और कोतवाली गंगाघाट प्रभारी को निर्देश जारी करना चाहिए कि महिला पर सुसंगत धारा में अभियोग पंजीकृत करें। साथ ही, महिला को आदेश देना चाहिए कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच नहीं हो जाती,उन्नाव बार में विधिक व्यवसाय न करे।

Related News

7775078405805895489

Lates Post

63
Poll

भारत का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा?

Scroll to Top