वाराणसी में भक्ति और अनुशासन के साथ सम्पन्न हुई भव्य फूलों की होली

हरे कृष्ण इस्कॉन बनारस ने रचा आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत दृश्य

वाराणसी। धर्म और संस्कृति की विश्व राजधानी काशी में इस वर्ष फूलों की होली ने भक्ति,अनुशासन और पर्यावरण जागरूकता का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। इस्कॉन बनारस द्वारा एल.टी. कॉलेज,अर्दली बाजार परिसर में आयोजित इस दिव्य उत्सव में लगभग 1200 श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया।कार्यक्रम का शुभारंभ संकीर्तन से हुआ,जिसने पूरे वातावरण को कृष्णमय कर दिया। विभिन्न सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों ने समूह नृत्य प्रस्तुत कर अपनी कला को भगवान श्रीकृष्ण की सेवा में समर्पित किया। वहीं बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत भरतनाट्यम नृत्य ने कार्यक्रम को शास्त्रीय गरिमा प्रदान की। विशेष आकर्षण रहा “नृत्याक्षी इस्कॉन अकादमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स” की प्रस्तुति,जिसमें कलाकारों ने तकनीकी शुद्धता,भावाभिनय और अनुशासन का अद्भुत प्रदर्शन किया। यह प्रस्तुति कला के माध्यम से भक्ति और संस्कारों के प्रसार का सशक्त उदाहरण बनी। फूलों की होली के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के साथ लगभग 700 किलोग्राम ताजे पुष्पों से होली खेली गई,जबकि पुष्प अभिषेक में 200 किलोग्राम से अधिक पुष्प अर्पित किए गए,जिनमें 30 से अधिक प्रकार के फूल सम्मिलित थे। जल और रासायनिक रंगों के प्रयोग के बिना सम्पन्न इस आयोजन ने स्वच्छ एवं पर्यावरण अनुकूल उत्सव का संदेश दिया। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षणों में पुष्प अभिषेक,महाराज का प्रेरणादायी प्रवचन,महाआरती एवं भव्य पालकी उत्सव शामिल रहे। वैश्विक इस्कॉन शासी निकाय के सदस्य स्तोका कृष्ण स्वामी ने अपने उद्बोधन में कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य सेवा,करुणा और ईश्वर भक्ति के माध्यम से समाज में संतुलन स्थापित करना है। इस्कॉन बनारस के अध्यक्ष युधिष्ठिर प्रभु ने बताया कि काशी में इस्कॉन का कार्य केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं,बल्कि शिक्षा,सेवा और संस्कार के समन्वित मिशन के रूप में संचालित हो रहा है। वहीं कार्यक्रम के महाप्रबंधक सचिन पौरुष ने कहा कि यह आयोजन समाज को स्वच्छ,सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल त्योहार मनाने की प्रेरणा देता है। प्रदेश सरकार के मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने भी अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं। प्रशासन,शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।समापन पर श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई। प्रशासन और आमजन दोनों स्तरों पर इस आयोजन को व्यापक सराहना मिली।भक्ति,संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का यह अद्भुत संगम काशी की सनातन परंपरा को पुनः जीवंत करता हुआ समाज को आध्यात्मिक उन्नयन की दिशा में प्रेरित कर गया।

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