नारी की सहभागिता से ही सुदृढ़ होगा राष्ट्र निर्माण कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के योग साधना केंद्र में आज अपराह्न 2:30 बजे “नारी शक्ति वंदन अधिनियम-प्रचार अभियान” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।कार्यक्रम ने नारी सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता और प्रतिबद्धता का सशक्त संदेश दिया गया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि नारी शक्ति राष्ट्र की आधारशिला है और महिलाओं की सक्रिय सहभागिता के बिना लोकतंत्र की कल्पना अधूरी है। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं को राजनीतिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया।
बतौर मुख्य अतिथि
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रचार्या डॉ. मिथिलेश सिंह (अग्रसेन महिला पीजी कॉलेज) ने अपने उद्बोधन में कहा कि नारी शिक्षा और आत्मनिर्भरता ही सशक्त समाज का मूल आधार है, तथा इस प्रकार के अभियान महिलाओं में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास करते हैं।
उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन के संदर्भ में काशी की परंपरा का उल्लेख करते हुए ‘नमः पार्वती पतये हर-हर महादेव’ का उच्चारण किया जाता है, जिसमें नारी और पुरुष को एक-दूसरे के पूरक रूप में स्वीकार किया गया है। यह मंत्र इस बात का प्रतीक है कि सृष्टि और समाज के संतुलन में स्त्री और पुरुष दोनों की समान एवं संयुक्त भूमिका है। नारी को पुरुष के साथ जोड़कर देखा जाना ही भारतीय संस्कृति की उस उच्च भावना को प्रकट करता है, जहाँ दोनों मिलकर जीवन के पूर्णत्व का निर्माण करते हैं।”
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बतौर विशिष्ट अतिथि
राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, चौकाघाट की प्रचार्या डॉ. नीलम गुप्ता ने कहा कि महिलाओं को केवल अधिकार ही नहीं, बल्कि अवसर और मंच भी मिलना आवश्यक है, ताकि वे समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकें।आज समाज के साथ-साथ परिवार भी महिलाओं को उचित सम्मान और महत्व देने लगा है। उन्होंने कहा कि यदि परिवार का सहयोग और प्रोत्साहन न मिला होता, तो आज वे न तो एक सफल चिकित्सक बन पातीं और न ही किसी महाविद्यालय का कुशलतापूर्वक नेतृत्व कर पातीं। यह परिवर्तन समाज में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और उनके सशक्तिकरण का सजीव प्रमाण है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।
स्वागत और अभिनन्दन
कार्यक्रम की नोडल अधिकारी प्रो. विद्या कुमारी ने कुशल स्वागत करते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का प्रतीक है, जो महिलाओं को सशक्त और स्वावलंबी बनाने की दिशा में प्रेरित करता है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को इस अभियान को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर विभिन्न वक्ताओं ने नारी सशक्तिकरण, समान अधिकार एवं सामाजिक समता पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अध्यापकगण, अधिकारीगण, कर्मचारीगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।
संचालन डॉ श्रृंगध्रा ने किया।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ सुमिता ने किया।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में
वैदिक मंगलाचरण, पौराणिक मंगलाचरण किया गया।
दीप प्रज्वलन
मंचासिन अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।
उक्त अवसर पर प्रो दिनेश कुमार गर्ग, प्रो अमित कुमार शुक्ल, डॉ विमल कुमार त्रिपाठी सहित विद्यार्थियों आदि उपस्थित थी।