क्या सफाई कर्मचारियों को अपने महापुरुषों की जयंती मनाने का अधिकार नहीं?”—विशेष अवकाश की मांग तेज

वाराणसी। उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय संयुक्त सफाई कर्मचारी संघ (रजि.) के प्रदेश अध्यक्ष सोनचंद बाल्मीकि ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए राज्य सरकार और समाज के विभिन्न संगठनों से सवाल किया है कि क्या सफाई कर्मचारियों को अपने महापुरुषों की जयंती और परिनिर्वाण दिवस मनाने का अधिकार है या नहीं। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर सहित अन्य महापुरुषों और गुरुओं की जयंती या परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर, जहां आम जनमानस को उन्हें श्रद्धांजलि देने और कार्यक्रम आयोजित करने की स्वतंत्रता मिलती है,वहीं सफाई कर्मचारियों को इन अवसरों पर सड़कों की सफाई,झाड़ू लगाने और चुना छिड़कने जैसे कार्यों में लगा दिया जाता है। यह स्थिति उनके मौलिक अधिकारों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। सोनचंद बाल्मीकि ने बताया कि अब तक सरकार की ओर से सफाई कर्मचारियों के लिए इन महत्वपूर्ण अवसरों पर किसी प्रकार के विशेष अवकाश की घोषणा नहीं की गई है। यदि कोई कर्मचारी इन दिनों अपने कार्य पर उपस्थित नहीं होता, तो उसका वेतन काट लिया जाता है,जो कि अन्यायपूर्ण है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सफाई कर्मचारी संगठनों के नेता और विभिन्न राजनीतिक दलों में शामिल वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधि इस विषय पर सरकार से ठोस मांग क्यों नहीं करते,बल्कि केवल औपचारिक बधाई देकर अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट जाते हैं।उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी संगठन या नेता पर कटाक्ष करना नहीं है,बल्कि सरकार और समाज का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित करना है,ताकि सफाई कर्मचारियों को भी अपने महापुरुषों के जन्मदिवस और परिनिर्वाण दिवस को सम्मानपूर्वक मनाने की स्वतंत्रता मिल सके। सफाई कर्मचारियों ने सरकार से मांग की है कि इन विशेष अवसरों पर उनके लिए अवकाश घोषित किया जाए,जिससे वे भी अपने आदर्शों को याद कर सकें और सामाजिक सम्मान के साथ अपनी आस्था व्यक्त कर सकें।

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