योगासन प्रतियोगिता में वाराणसी स्तर पर प्रतिभागियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन, विश्वविद्यालय के साधकों ने जीते अनेक पदक।

सम्पूर्ण जनपद में डॉ. राजकुमार, राज सिंह, सीमा देवी ने स्वर्ण पदक एवं कुणाल ने रजत

योग भारतीय संस्कृति की आत्मा है। कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा।

योग भारतीय संस्कृति की आतमा है और यह शरीर, मन एवं आत्मा के समन्वित विकास का सशक्त माध्यम है। ऐसे आयोजन युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं तथा उन्हें उच्च स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते हैं। वर्तमान परिवर्तित जीवन परिदृश्य में योग न केवल स्वास्थ्य संरक्षण का आधार है, बल्कि यह व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास का मार्ग भी प्रशस्त करता है।”

उक्त विचार सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने योग एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से योगासन स्पोर्ट्स एलायंस एसोसिएशन, वाराणसी के तत्वावधान में आयोजित जिला स्तरीय योगासन खेल प्रतियोगिता–2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए व्यक्त किए।

प्रतियोगिता में जिले के 15 विद्यालयों से आए कुल 220 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर योग-कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के प्रतिभागियों ने उल्लेखनीय सफलता अर्जित की। विश्वविद्यालय के योग प्रशिक्षक डॉ. राजकुमार मिश्र ने 45–55 वर्ष आयु-वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक अर्जित किया। वहीं एम.ए. (योग) के छात्र राज सिंह ने 21–25 आयु-वर्ग में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। कुमारी दीपिका ने 35–45 आयु-वर्ग में रजत पदक अर्जित कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

इसी क्रम में विश्वविद्यालय के नियमित साधक विकास अग्रहरी ने 25–35 आयु-वर्ग में स्वर्ण पदक प्राप्त किया, जबकि कुणाल गुप्ता ने द्वितीय स्थान प्राप्त कर रजत पदक अर्जित किया। सीमा देवी ने 35–45 आयु-वर्ग में स्वर्ण पदक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

यह प्रतियोगिता न केवल प्रतिभाओं के प्रदर्शन का सशक्त मंच सिद्ध हुई, अपितु युवाओं में योग के प्रति बढ़ती रुचि एवं जागरूकता का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।

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