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स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज की जीवन रक्षक एम्बुलेंस में बड़ा खेल।

मरीजो को ले जाने वाली TATA की एम्बुलेंस का नंबर UP44 G0163,सरकारी परिवहन रजिस्ट्रेशन एप पर नजर आ रही है Mahindra कंपनी की गाड़ी के नाम पर रजिस्ट्रेशन।

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2012 में हुआ है गाड़ी का रजिस्ट्रेशन,2027 तक है इस UP44G0163 नंबर का फिटनेस।

 

बिना पल्यूशन और इंश्योरेंस के सड़क पर दौड़ रही है मेडिकल कॉलेज की एम्बुलेंस UP44 G 0163.

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ऑनलाइन दर्ज गाड़ी दिखा रही महिंद्रा कंपनी की,जबकि रजिस्ट्रेशन प्लेट लगी है टाटा कंपनी की गाड़ी पर।

 

बड़ा सवाल—आखिर कौनसा किस तरह से चल रहा खेल।

 

आखिर यहा कैसे हो सकता है संभव,गाड़ी किसी कंपनी की और दर्ज किसी और कंपनी के नाम पर।

 

इतने सालों में क्या कभी नही कराया गया इंश्योरेंस….?

 

अगर कराया गया तो कैसे नही पता चला नंबर रजिस्ट्रेशन का खेल।

 

कहीं किसी और कार्य में तो नही लाई जाती थी ये गाड़ी….?

 

इस गाड़ी से कभी कोई होती है घटना या दुर्घटना, तो आखिर कौन होगा ज़िम्मेदार….?

 

इस मामले पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ सलिल श्रीवास्तव का बयान-

 

सीएमएस मामले में देंगे पूरी जानकारी।

 

मामले पर सीएमएस डॉ आर के मिश्रा का कहना-

 

यह गाड़ी पुलिस लाइन अस्पताल से जिला अस्पताल को उपहार के तौर पर दी गई थी,मेरे कार्यकाल 2004-05 के दौरान से है ये गाड़ी अस्पताल में है।

 

एम्बुलेंस खेल के सवाल पर चौके सीएमएस…?

 

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