ऋषि-परम्परा से विश्व कल्याण तक : सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में 19 जून से तीन दिवसीय योग महोत्सव।

योग ऋषियों की दिव्य साधना है, जो विश्व शान्ति, स्वास्थ्य और मानव कल्याण का आधार बन चुकी है: कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा

वाराणसी, 16 जून 2026।
भारतीय ज्ञान-परम्परा, संस्कृत संस्कृति तथा योग-दर्शन के सार्वभौमिक संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में “ऋषि-परम्परा से विश्व कल्याण तक” विषयक तीन दिवसीय योग महोत्सव-2026 का आयोजन 19, 20 एवं 21 जून 2026 को प्रातः 6:00 बजे से 7:00 बजे तक विश्वविद्यालय के दीक्षान्त लॉन में किया जाएगा।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन ऋषि-परम्परा, विश्वबन्धुत्व और लोकमंगल की महान भावना का उत्सव है। उन्होंने कहा कि योग, संस्कृत और संस्कृति का यह महापर्व विश्वविद्यालय की पहचान, उसके मूल उद्देश्यों तथा भारतीय सांस्कृतिक चेतना के गौरवपूर्ण स्वरूप को एक साथ अभिव्यक्त करता है।
कुलपति ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की ऐसी अमूल्य धरोहर है, जो मनुष्य को शारीरिक आरोग्य, मानसिक संतुलन, आत्मिक उत्कर्ष तथा सामाजिक समरसता का मार्ग प्रदान करती है। आज सम्पूर्ण विश्व योग को अपनाकर भारतीय ज्ञान-परम्परा की वैज्ञानिकता, प्रासंगिकता और सार्वभौमिकता को स्वीकार कर रहा है। योग केवल स्वास्थ्य का साधन नहीं, बल्कि जीवन को उत्कृष्टता, अनुशासन और आत्मबोध की दिशा देने वाली समग्र जीवन-पद्धति है।
उन्होंने कहा कि सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा, योग एवं ऋषि-चिन्तन की जीवंत परम्पराओं का संवाहक और संरक्षक केन्द्र है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि संस्कार, संस्कृति एवं मानव कल्याण के शाश्वत आदर्शों को समाज में प्रतिष्ठित करना भी है। इसी दृष्टि से आयोजित यह योग महोत्सव युवा पीढ़ी को भारतीय जीवन-मूल्यों, स्वस्थ जीवनशैली तथा आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है।
प्रो. शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते तनाव, प्रतिस्पर्धा, असंतुलित जीवनशैली और मानसिक चुनौतियों के बीच योग सम्पूर्ण मानवता के लिए आशा, स्वास्थ्य और शांति का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। योग शरीर, मन और आत्मा के समन्वय का विज्ञान है, जो व्यक्ति को स्वयं से, समाज को संस्कृति से तथा विश्व को बन्धुत्व और सद्भाव की भावना से जोड़ता है। यही कारण है कि आज योग विश्व मानवता के लिए भारतीय संस्कृति का सबसे प्रभावशाली उपहार बन चुका है।
योग विज्ञान पाठ्यक्रम के निदेशक डॉ. दुर्गेश पाठक के निर्देशन एवं संयोजन में आयोजित इस महोत्सव में प्रख्यात योगाचार्य राजकुमार मिश्र तथा श्री आदित्य कुमार प्रतिभागियों को योगाभ्यास, प्राणायाम, ध्यान एवं स्वस्थ जीवन-पद्धति का प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी तथा उनके परिजनों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की गई है।
डॉ. दुर्गेश पाठक ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, अनुशासित, जागरूक एवं उद्देश्यपूर्ण बनाने की वैज्ञानिक तथा आध्यात्मिक साधना है। विश्वविद्यालय का सतत प्रयास है कि योग के माध्यम से भारतीय ज्ञान-परम्परा के जीवनोपयोगी मूल्यों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाया जाए तथा स्वस्थ एवं संस्कारित समाज के निर्माण में योगदान दिया जाए।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं काशी के नागरिकों से इस योग महोत्सव में सहभागिता करने का आग्रह किया है। प्रशासन का विश्वास है कि यह आयोजन भारतीय संस्कृति के महान आदर्श सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः को साकार करते हुए स्वस्थ, समरस, जागरूक एवं संस्कारित समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तथा योग के माध्यम से भारत की ऋषि-परम्परा के वैश्विक संदेश को और अधिक सशक्त रूप से प्रसारित करेगा।

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