
वाराणसी, 20 मार्च, 2026 काशी हिंदू विश्वविद्यालय के दृश्य कला संकाय द्वारा आयोजित की जा रही सात दिवसीय राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी और कार्यशाला नवारंभ का समापन हुआ।
इस अवसर पर प्रसिद्ध कला समीक्षक प्रयाग शुक्ल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने प्रदर्शनी को कलाकार का संवाद बताते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही कार्यशाला के माध्यम से कला प्रक्रिया से भी परिचय प्राप्त होता है। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में छात्र अधिष्ठाता प्रोफेसर रंजन कुमार सिंह, आई०आई०टी० बी०एच०यू० के मुख्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. संजय सिंह, संयुक्त कुलसचिव डॉ. संजय कुमार, प्रो० ज्योति रोहिल्ला राना, डा० निशांत, डा० प्रवीण राणा, प्रो० सीमा तिवारी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने इस कलात्मक पहल की प्रशंसा करते हुए विद्यार्थियों को ज्यादा से ज्यादा सीखने के लिए प्रेरित किया।
यहां प्रदर्शित 200 चित्रों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया गया। इसमें प्रो. उत्तमा दीक्षित, डॉ. सुनील कुमार पटेल, कुमारी साधना, इंदल यादव, कौशिकी चौहान, सतीश कुमार पटेल, यज्ञांश ठाकुर, प्रकृति तथा श्रेयसी पाठक के चित्र प्रदर्शित किए गए हैं।
इस संयुक्त कार्यक्रम के माध्यम से काशी की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और कलात्मक विरासत को एक नवीन सृजनात्मक दृष्टिकोण से पुनः देखने का सन्देश दिया गया।
आयोजित कार्यशाला में मॉरीशस के हिमेश बाबूलाल ने वहां के पक्षी डोडो को प्रकृति के साथ चित्रित किया है, बांग्लादेश की सुदीप्ता ने फूलों की वादियों और नदी को बनाया है, इसी प्रकार केरलम, जयपुर, कोलकाता, बर्धमान, दिल्ली, चंडीगढ़, गुरुग्राम, फरीदाबाद, ग़ाज़ियाबाद, मुज़फ़्फ़रनगर, आगरा, कानपुर, लखीमपुर खीरी, कुशीनगर, जमशेदपुर, राँची, बोकारो, हजारीबाग, धनबाद, बालासोर, बालाघाट, पटना, नालंदा, देवरिया, चंदौली, जौनपुर, अयोध्या, आजमगढ़, ग़ाज़ीपुर, वाराणसी जैसे स्थानों से आए 60 से अधिक प्रतिष्ठित कलाकारों ने अपने सृजन के माध्यम से कला के विविध रूपों प्रकृति, गंगा घाट, स्त्री, ग्रामीण जीवन, श्रद्धा, शहरी जीवन की जटिलता, संस्कृति और आस्था को मूर्त अमूर्त आकारों में केनवास पर साकार किया।
इस कार्यशाला का संयोजन प्रो. उत्तमा दीक्षित, संकाय प्रमुख, दृश्य कला संकाय द्वारा किया जा रहा है। सह-संयोजक के रूप में डॉ. ललित मोहन सोनी एवं डॉ. सुरेश चंद्र जांगिड़ तथा आयोजन समिति के अंतर्गत प्रो. शांतिस्वरुप सिन्हा, मूर्तिकला विभागाध्यक्ष प्रो. ब्रह्मस्वरुप, व्यावहारिक कला विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष अरोड़ा, श्री के. सुरेश कुमार, डॉ. आशीष कुमार गुप्ता, डॉ. अमरेश कुमार तथा डॉ. सुनील कुमार पटेल ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

भाग लेने वाले आमंत्रित कलाकार गणों में प्रो. रीता सिंह, सतीश कुमार पंडित, डॉ. ओम प्रकाश गुप्ता, नरेंद्र कुमार, सरोज कुमार मिश्रा, ओम प्रकाश, वनिता मिधा, प्रतिमा पांडे, तपन राॅय, वीरेंद्र कुमार वर्मा, संतोष कुमार शील, जयंती मांडी, डॉ. आशीष कुमार गुप्ता, सीमा गुप्ता, डॉ. रीना सिंह, अभिनव दीप, डॉ. स्नेहलता कुशवाहा, डॉ. वर्षा सिंह, संजीव गुप्ता, मुक्तिपद नंदी, विजय लक्ष्मी सिंह, शालिनी कश्यप, शालिनी यादव, सुरेश कुमार सौरभ, आकांक्षा सिंह, बलदाऊ जी वर्मा, लालन यादव, मनोज सिंह, त्रिभुवन नाथ, रविशंकर सिंह प्रमुख रूप से उल्लेखनीय हैं।
इस कार्यशाला के माध्यम से कला, संस्कृति और अध्यात्म का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया गया है।