
सुल्तानपुर,,ताजखानपुर। सातवीं मोहर्रम को ताजखानपुर इमामबारगाह से जुलूस रिवायती अंदाज़ और अज़ीम अकीदत के साथ बरामद हुआ। ताजखानपुर, महमूदखानी, अफलेपुर और बहादुरपुर के अज़ादारों ने मिलकर एक साथ यौम-ए-अज़ा मनाया। इस्लामी रिवायत के मुताबिक 7 मोहर्रम 61 हिजरी को यज़ीदी लश्कर के सिपहसालार इब्न-ए-साद ने हुक्म जारी किया कि हज़रत इमाम हुसैन अ.स. और उनके असहाब-ओ-अहल-ए-बैत पर दरिया-ए-फ़रात का पानी बंद कर दिया जाए। इब्न ए जिआद को 500 सवारों के साथ नहर-ए-फ़रात पर पहरा बिठा दिया गया। हज़रत अब्बास अ.स. को ‘सक़्क़ा-ए-सकीना ने कहा, मगर इस सख़्त पहरे के बावजूद तीन दिन तक ख़ेमों में पानी की एक बूंद न पहुंच सकी। बीबी सकीना स.अ. और मासूम अली असग़र अ.स. प्यास की शिद्दत से निढाल हो गए। हज़रत अब्बास अ.स. कई बार मश्क लेकर पानी लेने निकले, लेकिन दुश्मन के तीरों की बारिश ने उन्हें नाकाम लौटा दिया। इसी सबब से 7 मोहर्रम को ‘सुकूत-ए-आब’ यानी पानी बंद होने के दिन के तौर पर याद किया जाता है। यह दिन सब्र, क़ुर्बानी और हक़ पर डटे रहने का पैग़ाम देता है।जुलूस अपने रिवायती रास्तों से होता हुआ चारों गांव की इमामबारगाहों से गुज़रा। अकीदतमंदों ने जगह-जगह सबील, शरबत और तबर्रुक का एहतिमाम किया। दमगड़िया चौराहा पर अंजुमन असगरिया ताजखानपुर अंजुमन लश्करे हुसैन अफलेपुर,अंजुमन अब्बासिया बहादुरपुर समेत तमाम अंजुमनों ने अपने-अपने अंदाज़ में पुरसा पेश किया।’लेडी सिंघम’ के नाम से मशहूर सुल्तानपुर पुलिस अधीक्षक चारु निगम की क़यादत में पुलिस इंतेज़ामिया आख़िर तक मुस्तैद रही। अज़ादारों ने अमन-ओ-भाईचारे के साथ जुलूस को पुरसुकून तरीक़े से मुकम्मल किया।