नई दिल्ली में भव्य समारोह के दौरान “चित्त चंपा” पुस्तक का हुआ लोकार्पण।

वाराणसी। भारतीय संस्कृति,संस्कृत एवं वैदिक अध्ययन के साथ-साथ आत्मरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली वाराणसी की प्रतिभाशाली विदुषी एवं कराटे ब्लैक बेल्ट धारक स्मृति आर्या को नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में प्रतिष्ठित “भारत गौरव प्रतिभा रत्न अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें नारी सशक्तिकरण,शिक्षा,संस्कार और आत्मरक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रदान किया गया। पश्चिम विहार स्थित रैडिसन ब्लू होटल में इंटरनेशनल अवॉर्ड काउंसिल द्वारा आयोजित इस गरिमामयी समारोह में देशभर की कई विशिष्ट हस्तियाँ उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश शासन के राज्यमंत्री एवं विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण,ग्वालियर के अध्यक्ष अशोक शर्मा रहे, जबकि समारोह की अध्यक्षता भारत सरकार के सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तनवीर ज़फर अली ने की। विशिष्ट अतिथियों में पूर्व स्टेट टेक्निकल हेड विष्णुकांत कंकणे, रेलवे मंत्रालय से जुड़े हरिओम शर्मा तथा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मुकेश कुमार त्रिपाठी भी मौजूद रहे।कार्यक्रम के दौरान “53 पुष्प गीत एवं कविताओं” के विशेष आयोजन में चर्चित पुस्तक “चित्त चंपा” का भव्य विमोचन भी किया गया, जिसने समारोह को साहित्यिक गरिमा प्रदान की। मुजफ्फरपुर की पावन धरती पर जन्मी स्मृति आर्या ने संस्कृत एवं वैदिक अध्ययन में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त कर भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वाराणसी के प्रतिष्ठित पाणिनी कन्या महाविद्यालय (गुरुकुल) में अध्ययन के दौरान उन्होंने वेद,उपनिषद,व्याकरण और दर्शन का गंभीर अध्ययन किया तथा भारतीय गुरुकुल परंपरा के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात किया। विशेष उपलब्धि यह रही कि स्मृति आर्या ने कराटे में ब्लैक बेल्ट प्राप्त कर अपने गुरुकुल की पहली छात्रा बनने का गौरव हासिल किया। यह उपलब्धि आज की युवा पीढ़ी,विशेषकर बालिकाओं के लिए आत्मरक्षा,आत्मविश्वास और अनुशासन का प्रेरणादायी उदाहरण बन चुकी है। वर्तमान में प्रशिक्षक के रूप में कार्यरत स्मृति आर्या शिक्षा,संस्कार एवं आत्मरक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य कर रही हैं। उनका मानना है कि “शास्त्र और शस्त्र” दोनों का संतुलित समन्वय ही एक सशक्त,संस्कारित और आदर्श व्यक्तित्व का निर्माण करता है।समारोह में उपस्थित अतिथियों ने स्मृति आर्या के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें भारतीय नारी शक्ति,संस्कृति और युवा चेतना की प्रेरणादायी प्रतीक बताया। सम्मान प्राप्त करने के बाद स्मृति आर्या ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों एवं गुरुकुल के आचार्यों को देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति,शिक्षा और आत्मरक्षा के मूल्यों को समाज तक पहुँचाना ही उनके जीवन का प्रमुख उद्देश्य है।