श्री अग्रसेन कन्या पी.जी. कॉलेज में संगीत विभाग द्वारा व्याख्यान का आयोजन

श्री अग्रसेन कन्या पी.जी. कॉलेज वाराणसी के बुलानाला परिसर में सांस्कृतिक केंद्र एवं स्वरांगन कल्चरल क्लब के संयुक्त तत्वावधान में “ भारतीय शास्त्रीय संगीत में स्वर साधना एवं कंठ विकास की पारंपरिक तकनीक” विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया lकार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रो रामशंकर, मंच कला संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने भारतीय शास्त्रीय संगीत में स्वर साधना का महत्त्व एवं कंठ विकास की तकनीकियों पर प्रकाश डालते हुए अपना प्रदर्शनात्मक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार स्वर साधना के अंतर्गत नियमित रियाज़, शुद्ध स्वरों का अभ्यास, अलंकार, सरगम तथा मंन्द्र,मध्य और तार सप्तक में स्वर विस्तार का अभ्यास किया जाता है। शास्त्रीय संगीत में कंठ विकास के लिए प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा में ओंकार साधना, आकार अभ्यास, प्राणायाम तथा धीमी गति में स्वर अभ्यास को विशेष महत्व दिया गया है। इन तकनीकों से गायक की आवाज़ में मधुरता, स्थिरता, लयबद्धता तथा स्वर नियंत्रण विकसित होता है।कार्यक्रम में सांस्कृतिक केंद्र समन्वयक डॉ अपर्णा शुक्ला ने बताया कि भारतीय शास्त्रीय संगीत में स्वर साधना एवं कंठ विकास की पारंपरिक तकनीकें संगीत शिक्षा का अत्यंत महत्वपूर्ण आधार मानी जाती हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत की यह पारंपरिक साधना न केवल गायन क्षमता को समृद्ध करती है, बल्कि मानसिक एकाग्रता और आध्यात्मिक चेतना का भी विकास करती है। धन्यवाद ज्ञापन नीता दिसावाल द्वारा किया गया।कार्यक्रम में सांस्कृतिक केंद्र की सदस्य डॉ वेणु वनिता, अरुण शाह एवं संगीत विभाग की छात्राएं उपस्थिति रही।

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