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एससी-एसटी जमीन की परमिशन और मेडिकल बिल पास करने में चलता है लाखों का धंधा

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बाबूजी की अवैध वसूली का खेल!

जिले में भ्रष्टाचार का ऐसा तंत्र पनप चुका है जहां बिना अवैध वसूली के न तो मेडिकल बिल पास होते हैं और न ही एससी-एसटी वर्ग की जमीन की परमिशन मिलती है। स्वास्थ्य और राजस्व विभाग की फाइलों पर बैठा बाबू विनोद तिवारी इस पूरे खेल का अहम किरदार बताया जा रहा है।

जमीन की परमिशन पर भी “नजराना” अनिवार्य

एससी-एसटी वर्ग की जमीन बेचने या उस पर निर्माण की अनुमति लेने के लिए राजस्व विभाग की प्रक्रिया बेहद जटिल है। नियम के अनुसार, जमीन तभी बेची जा सकती है जब उसके पीछे कोई बड़ी वजह हो—जैसे बेटी की शादी या गंभीर बीमारी का इलाज।

इसी प्रक्रिया में स्वास्थ्य विभाग की “मेडिकल रिपोर्ट” सबसे अहम भूमिका निभाती है। आरोप है कि बाबू विनोद तिवारी इस मेडिकल फाइल को बनाने से लेकर सीएमओ कार्यालय से पास कराने तक का ठेका लेते हैं। जो लोग “नजराना” देते हैं, उनकी फाइल चुटकियों में पास हो जाती है, जबकि बिना चढ़ावे के फाइल महीनों कार्यालय में धूल फांकती रहती है।

 

 

मेडिकल बिल पास कराने में होता है सौदेबाजी

 

यही नहीं, विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों के मेडिकल बिल भी बिना रिश्वत के पास नहीं होते। एक वरिष्ठ कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया—

“मेरी फाइल करीब 40 हजार रुपये की थी। बिना पैसा दिए मैंने पास कराने की कोशिश की, तो सिर्फ 15 हजार रुपये का ही बिल पास हुआ। जबकि मैंने मेदांता हॉस्पिटल का पूरा बिल लगाया था।”

 

दूसरे कर्मचारी का कहना है कि एक लाख रुपये के मेडिकल बिल पर 10 से 15 हजार रुपये तक का “कट” देना पड़ता है। कई बार तो 30–40% तक रकम काट दी जाती है।

मंत्री का नाम लेकर बचाव

सूत्रों के मुताबिक, बाबू विनोद तिवारी अक्सर अधिकारियों से कहते हैं कि विभागीय मंत्री उनके रिश्तेदार हैं, इसलिए कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। जबकि मंत्री स्वयं लगातार निरीक्षण कर भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की बातें करते रहते हैं।

जांच से होगा खुलासा

स्थानीय लोगों और विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि अब तक पास की गई एससी-एसटी जमीन की परमिशन फाइलें और मेडिकल बिलों की जांच हो जाए तो “दूध का दूध और पानी का पानी” हो जाएगा। यह भी सामने आ जाएगा कि बाबू विनोद तिवारी को किस स्तर तक अधिकारियों का संरक्षण मिल रहा है और कैसे गरीबों की मजबूरी को कमाई का जरिया बना रखा है।

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