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गंगा दशहरा पर 56 परिवार करेंगे माँ गंगा को 56 भोग अर्पित, कई राज्यों से आई 5100 साड़ियाँ चढ़ेंगी। -

गंगा दशहरा पर 56 परिवार करेंगे माँ गंगा को 56 भोग अर्पित, कई राज्यों से आई 5100 साड़ियाँ चढ़ेंगी।

गंगा प्राकट्य उत्सव एवं चुनरी अर्पण मनोरथ कार्यक्रम 26 मई को अस्सी घाट पर।

काशी की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धरा पर आगामी 26 मई 2026, मंगलवार को ब्रह्मराष्ट्र एकम् विश्व महासंघ न्यास, काशी एवं श्रीकुल पीठ के तत्वावधान में भव्य “माँ गंगा प्राकट्य उत्सव (गंगा दशहरा)” का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन अस्सी घाट, वाराणसी पर श्रद्धा, भक्ति, सेवा और सनातन संस्कृति के महा-संगम के रूप में सम्पन्न होगा।

कार्यक्रम की विशेषता यह रहेगी कि 56 परिवारों द्वारा माँ गंगा को 56 प्रकार के भोग अर्पित किए जाएंगे, साथ ही देश के लगभग 12 राज्यों से आई 5100 साड़ियों से माँ गंगा को विशेष चुनरी अर्पित की जाएगी। इसके अतिरिक्त 501 लीटर दूध से माँ गंगा का दुग्धाभिषेक भी किया जाएगा।

पूज्य श्री श्री 1008 डॉ. सचिन्द्र नाथ जी महाराज, पीठाधीश्वर – श्रीकुल पीठ ने बताया कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारत की आस्था, संस्कृति और सनातन चेतना की जीवनधारा हैं। गंगा दशहरा का यह पावन पर्व माँ गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का प्रतीक है, इसलिए इस दिन गंगा स्नान, सेवा, आरती और दान का विशेष महत्व माना गया है।

उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को अपनी संस्कृति, परंपराओं और गंगा संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार राजा भगीरथ ने कठोर तपस्या कर गंगा को पृथ्वी पर लाया, उसी प्रकार आज हम सबका दायित्व है कि माँ गंगा की स्वच्छता, पवित्रता और अविरलता को बनाए रखें।

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रातः 7:00 बजे से 9:00 बजे तक चुनरी मनोरथ, सायं 4:00 बजे से रात्रि 12:00 बजे तक 56 भोग अर्पण, सायं 6:30 बजे भव्य गंगा आरती, तथा सायं 5:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर विभिन्न प्रांतों से आए श्रद्धालु, कलाकार एवं सनातन धर्म प्रेमी सहभागी होंगे।

आयोजन समिति ने बताया कि यह कार्यक्रम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि “आस्था का महासंगम” है, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के सम्मिलित होने की संभावना है। आयोजन से प्राप्त सहयोग राशि गंगा सेवा, धर्म कार्य एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में समर्पित की जाएगी।

पूज्य महाराज जी ने समस्त काशीवासियों एवं देशभर के श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता कर माँ गंगा की कृपा एवं आशीर्वाद प्राप्त करें।

शिव की जटाओं से निकली गंगा धारा,

जिसने पापों से तार दिया जग सारा।

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