काशी हिंदू विश्वविद्यालय की संकाय प्रमुख प्रो. उत्तमा दीक्षित का शोध पत्र इटली में अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस, फ्लोरेंस इटली के लिए चयनित, आज फ्लोरेंस में प्रस्तुत किया शोध पत्र।

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के दृश्य कला संकाय की संकाय प्रमुख और चित्रकला विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर, प्रो. उत्तमा दीक्षित ने एक बार फिर वैश्विक पटल पर विश्वविद्यालय और भारत का नाम रोशन किया है। इटली के ऐतिहासिक शहर फ्लोरेंस में स्थित लक्जरी होटल सिना विला मेडिसी में 10 से 12 जून 2026 तक आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित 12वें इंटरनेशनल साइंटिफिक कॉन्फ्रेंस इराज 2026 में प्रस्तुति के लिए उनके शोध पत्र का चयन किया गया है। इस वर्ष के सम्मेलन का मुख्य विषय ” ज्ञान-आधारित सतत विकास” निर्धारित किया गया है। इस अत्यंत महत्वपूर्ण, प्रतिस्पर्धी और उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में आमंत्रण मिलना काशी हिंदू विश्वविद्यालय और पूरे देश के लिए गर्व का विषय है, जिससे वैश्विक स्तर पर देश की अकादमिक साख और शान बढ़ी है।प्रो. उत्तमा दीक्षित इस शोध पत्र की एकमात्र लेखिका हैं, जो उनके गहन अध्ययन और मौलिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। सम्मेलन के मुख्य विषय के अंतर्गत उनके शोध का विशिष्ट शीर्षक
ज्ञान-प्रधान संगठनों में बौद्धिक सुव्यवस्थीकरण, मानसिक कल्याण और सतत उत्पादकता बढ़ाने के लिए कलात्मक हस्तक्षेप है। अपने इस अनूठे शोध के माध्यम से उन्होंने वैश्विक मंच पर यह प्रदर्शित किया कि कैसे कलात्मक दृष्टिकोण और दृश्य कला के माध्यम से बड़े संगठनों में काम करने वाले बुद्धिजीवियों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों के मानसिक तनाव को दूर किया जा सकता है। उनका यह अध्ययन वैश्विक स्तर पर सतत विकास के लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में संगठनों के भीतर काम करने वाले लोगों के मानसिक कल्याण, कार्यक्षमता और उत्पादकता में सतत वृद्धि करने के लिए एक क्रांतिकारी मार्ग प्रशस्त करता है।यह पहला मौका नहीं है जब प्रो. दीक्षित ने वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व किया हो। इसके पूर्व भी वे यूनिवर्सिटी ऑफ बार्सिलोना,स्पेन, magalang यूनिवर्सिटी, इंडोनेशिया समेत दुनिया के कई अन्य देशों में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में मुख्य वक्ता और शोधकर्ता के रूप में आमंत्रित की जा चुकी हैं। कला और शिक्षा के क्षेत्र में उनके निरंतर अंतरराष्ट्रीय योगदान ने वैश्विक अकादमिक जगत में भारतीय दृष्टिकोण को एक नई ऊंचाई दी है। 36 से अधिक देशों के 300 से अधिक शीर्ष शोधकर्ताओं की सहभागिता वाले इस इराज कॉन्फ्रेंस में भारत की ओर से उनका चयन एक अद्वितीय उपलब्धि है।
इस गौरवपूर्ण अवसर पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों, संकाय सदस्यों और छात्रों ने अत्यंत प्रसन्नता व्यक्त की है। विश्वविद्यालय परिवार का मानना है कि प्रो. दीक्षित का यह चयन बीएचयू की अकादमिक उत्कृष्टता को वैश्विक मान्यता दिलाने की दिशा में एक और मील का पत्थर है।