
वाराणसी 5 जून जिस जिस का मैं मौला उस उस के अली मौला। अपने आख़िरी हज से वापसी पर पैग़म्बर ए आज़म ने इस्लामी महीने ज़िल्हिज्जा की 18 तारीख़ को अपने चचेरे भाई और दामाद हज़रत अली को अल्लाह के हुक्म से अपने बाद हाकिम ओ पेशवा बनाया था। ग़दीर ए ख़ुम नामी जगह जो मक्का और मदीना के बीच स्थित है वहां सवा लाख हाजियो के मजमे में रसूलल्लाह ने हज़रत अली को अपने दोनों हाथों पर बुलंद करके कहा था कि जिस जिस का मैं मौला आज से उस उस का अली मौला। इस दिन सारी दुनिया के शिया मुसलमान ईद की तरह मनाते हैं।

इसी ईद की खुशियां मनाते हुए वाराणसी शहर में भी रात ही से महफ़िल का सिलसिला शुरू हो गया था। गुरुवार की रात करारा हाउस तेलियानाला में क़सीदा ख़्वानी की महफ़िल हुई जो देर रात तक चली। रविवार को दारानगर स्थित शिया जामा मस्जिद में भी जुमे की नमाज़ के बाद शायरों ने कलाम पेश किए। दिन में 4 बजे इमाम ए जुमा मौलाना सैयद ज़फर उल हुसैनी साहब की सदारत में करारा हॉउस पर महफ़िल ए बयान के एहतेमाम हुआ। बयान से पहले शोअरा ए केराम ने अपना कलाम पेश किया। महफ़िल को ख़िताब करते हुए आले जवादुल उलेमा मौलाना अक़ील हुसैनी ने ईद ए ग़दीर की फ़ज़ीलत और मौला अली के फ़ज़ाएल बयान किये। महफ़िल की निज़ामत मौलाना अमीन हैदर हुसैनी साहब ने की। महफ़िल में मौलाना मेहदी रज़ा, मौलाना इश्तियाक अली, मौलाना आलिम ज़ैदपुरी समेत हज़ारो की तादाद में मोमिनीन ने शिरकत की। इसी क्रम में दालमंडी, दरगाहे फ़ात्मान, शिवाला, बड़ी बाज़ार, मदनपुरा समेत लगभग सभी शिया बाहुल्य इलाकों में महफ़िल सजाई गई और खुशियां मनाई गई। लोगों ने अपने घरों में अच्छे पकवान बनाये, एक दूसरे की दावत की और बच्चों को ईदी दी। शिया जामा मस्जिद दारानगर के प्रशासनिक सचिव सैय्यद मुनाज़िर हुसैन मंजू ने बताया कि अगले तीन दिनों तक खुशियां मनाने का ये सिलसिला जारी रहेगा और इसी क्रम में शहर भर में महफिलें सजेंगी।