परीक्षा तैयारियों एवं शैक्षिक विभागों का कुलपति ने किया निरीक्षण।

संस्कृत विश्वविद्यालय में 28 मई से प्रारम्भ होने वाली परीक्षाओं की व्यवस्थाओं का लिया जायजा, अनुशासन एवं दायित्व निर्वहन पर दिया विशेष बल।

वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में 28 मई से प्रारम्भ होने वाली शास्त्री एवं आचार्य परीक्षाओं की तैयारियों का व्यापक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने परीक्षा भवन, मुख्य भवन, बहु संकाय भवन तथा विभिन्न विभागों में संचालित कक्षाओं का निरीक्षण कर पठन-पाठन एवं परीक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान कुलपति ने 28 मई से 09 जून 2026 तक आयोजित होने वाली सेमेस्टर एवं मुख्य परीक्षाओं के लिए चल रहे गोपनीय प्रपत्र भरने, परीक्षा सामग्री तैयार करने तथा अन्य व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने परीक्षा कार्य में लगे कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए भीषण गर्मी को दृष्टिगत रखते हुए सतर्कता एवं स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ कार्य करने को कहा।

कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय की परीक्षाएं देशभर में एक साथ आयोजित होती हैं, इसलिए परीक्षा की शुचिता, गोपनीयता एवं समयबद्धता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कर्मचारियों एवं अधिकारियों से पूर्ण जिम्मेदारी एवं समर्पण भाव के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया।

अनुपस्थित आचार्य पर विधिक कार्यवाही का निर्देश।

निरीक्षण के दौरान मुख्य भवन एवं बहु संकाय भवन में संचालित कक्षाओं की स्थिति का भी अवलोकन किया गया। इस क्रम में साहित्य विभाग के आचार्य प्रो. विजय कुमार पाण्डेय बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित पाए गए। इस पर कुलपति ने गंभीर संज्ञान लेते हुए विभागीय कर्मचारियों से जानकारी प्राप्त की तथा बिना सूचना अनुपस्थित रहने के मामले में विधिक कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि समय पर कार्यस्थल पर उपस्थित होकर अपने दायित्वों का निर्वहन करना प्रत्येक शिक्षक एवं कर्मचारी की जिम्मेदारी है तथा किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि यह संस्था देववाणी संस्कृत के अभ्युदय एवं संवर्धन के लिए निरंतर साधना भाव से कार्य कर रही है। यहां कार्य करने वाले सभी लोगों को पूजा भाव से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परम्परा के प्रसार एवं विकास के लिए अखिल भारतीय स्तर पर कार्य कर रहा है तथा इसे अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर स्थापित करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।

उन्होंने सभी शिक्षकों, कर्मचारियों एवं अधिकारियों से भारतीय ज्ञान परम्परा के संवर्धन तथा संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में समर्पित भाव से योगदान देने का आह्वान किया।

निरीक्षण के दौरान कुलसचिव राकेश कुमार, चीफ प्रॉक्टर प्रो. जितेन्द्र कुमार, परीक्षा नियंत्रक दिनेश कुमार सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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