
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पिछले दिनों लखनऊ पार्टी कार्यालय में पीडीए आडिट अंक 1 पीडीए आरक्षण घोटाला पुस्तिका को जारी किया। इस पुस्तिका में प्रमाण सहित बताया गया है कि कैसे उत्तर प्रदेश भाजपा की सरकार पिछड़ों और शोषित वर्ग के बेटे, बेटियों और बहुओं से संविधान प्रदत्त आरक्षण का अधिकार छीन लिया गया है? कैसे बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा दिये गये संविधान में इस बराबरी के अधिकार यानी आरक्षण को धीरे-धीरे समाप्त करने के प्रयास किये जा रहे है?
पुस्तिका में भाजपा सरकार ने 10 साल में 222 परीक्षाओं में 11,514 पीडीए आरक्षित सीटों की लूट का ब्यौरेवार वितरण दिया गया हैं यूपी भर्ती में पीडीए आरक्षण घोटाला के साथ 69 हजार शिक्षक भर्ती घोटाला में पूरा उल्लेख है।
प्रेसवार्ता में उपस्थित जिलाध्यक्ष सुजीत यादव लक्कड़, स्नातक एमएलसी आशुतोष सिंहा एवं जिला प्रवक्ता संतोष यादव “बबलू” एडवोकेट ने कहा कि श्रद्धेय बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी ने हमें संविधान के रूप में एक ऐसा दस्तावेज देकर गए हैं जिसमें सामाजिक न्याय का राज लाने की शक्ति है। उपेक्षित वंचित और शोषित समाज में ये चेतना पीडीए आंदोलन के रूप में बलवती हो चुकी है। आरक्षण के बगैर राजनीतिक लोकतंत्र अधूरा रह जाएगा। आरक्षण रूढ़िवादी, सामंती सामाजिक ढ़ांचे को तोड़ता है। भाजपा सरकार में भर्तियों में हुई आरक्षण की लूट और घोटाला को लेकर समाजवादी आडिट रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी भाजपा सरकार के पक्षपात और लूट के खिलाफ लड़ती रहेगी। आडिट रिपोर्ट में 69 हजार शिक्षक भर्ती, वन और वन्य जीव रक्षक भर्ती, बांदा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, एडेड जूनियर हाईस्कूल मास्टर/हेड मास्टर भती, ग्राम पंचायत अधिकारी भर्ती, नेत्र परीक्षण अधिकारी भर्ती, यूपीएसएसएससी आशुलिपिक भर्ती, लखीमपुर को-आपरेटिव भती, पशु चिकित्सव भती, लेखपाल भर्ती, स्वास्थ्य-शिक्षा अधिकारी भर्ती, चिकित्सा अधिकारी आयुर्वेद भर्ती, कृषि प्राविधिक सहायक भर्ती समेत 22 भर्तियों में हुए आरक्षण घोटाले की विस्तृत जानकारी दी।
पीडीए आरक्षण घोटाला पुस्तिका के अनुसार 69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी न्याय पाने के लिए हर जगह गये लेकिन भाजपा सरकार में न्याय नहीं मिला। 69 हजार शिक्षक भर्ती में पिछड़े वर्ग के छात्रों को 27 फीसदी संवैधानिक आरक्षण मिलना चाहिए लेकिन उन्हें सिर्फ 3.86 फीसदी आरक्षण मिला। इनके आरक्षण में 23.14 फीसदी की लूट हुई। अनुसूचित जाति का आरक्षण 21 फीसदी है, लेकिन 69 हजार शिक्षक भर्ती में उन्हें 16.21 फीसदी मिला। इनके आरक्षण की लूट 4.8 फीसदी हुई है। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी शिक्षक भर्ती में 20 हजार सीटों का घोटाला माना है। यूपी सरकार ने 2022 के चुनाव में खुद शिक्षक भर्ती में आरक्षण की लूट को स्वीकार किया और 6800 पदों की एक अतिरिक्त चयन सूची जारी की थी। भाजपा सरकार ने सबसे शर्मनाक कार्य करते हुए एसटी के 1133 पदों को खाली छोड़ दिया है। 69हजार शिक्षक भर्ती आरक्षण घोटाले में अगर सरकार की ही माने तो कुल 7933 (6800+1133) पदों की लूट हुई है।
समाजवादी पार्टी ने 69 हजार शिक्षक भर्ती के साथ-साथ 22 भर्तियों में हुए आरक्षण घोटाले और लूट उजागर किया है। भाजपा सरकार को जहां-जहां मौका मिला पदों की लूट कर ली है। इसी तरह से विश्वविद्यालयों की भर्तियों में एनएफएस (नाट फार सुटेबिल) लगाकर आरक्षित वर्ग के लोगों को बाहर कर देते हैं। भाजपा सरकार आरक्षण लूट के साथ डेटा छिपाने वाली सरकार है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी भाजपा सरकार के पक्षपात और लूट के खिलाफ लडाई लड़ती रहेगी। अब इस सरकार के दिन ज्यादा नहीं बचे है। समाजवादी पार्टी 2027 में सरकार बनाकर 90 दिन के अन्दर 69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों को न्याय दिलायेगी और जातीय जनगणना कराने का काम करेगी। समाजवादी सरकार सामाजिक न्याय के राज की स्थापना कर सभी को न्याय दिलायेगी। समाजवादी पार्टी सामाजिक और आर्थिक रूप से पीछे रह गये लोगों के लिए विशेष अवसर चाहती है।