काशीरत्न सम्मान से सम्मानित हुए हस्तशिल्प कला शिल्पी अनिल कसेरा। 

वाराणसी। पत्रकारिता दिवस की पूर्व संध्या पर सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित 31वें “काशी रत्न शान-ए-काशी रत्न अलंकरण समारोह” का आयोजन इंडियन एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (आईएजे) द्वारा भव्य रूप से संपन्न हुआ। समारोह में समाज, संस्कृति, शिक्षा, साहित्य, कला एवं लोक परंपराओं के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। इसी क्रम में काशी की प्राचीन हस्तशिल्प कला एवं पारंपरिक कारीगरी को नई पहचान दिलाने वाले प्रसिद्ध शिल्पी अनिल कसेरा को “ काशी रत्न सम्मान ” से अलंकृत किया गया।

अनिल कसेरा वर्षों से पारंपरिक धातु शिल्प एवं हस्तनिर्मित कलात्मक उत्पादों के निर्माण में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए हैं। उनके द्वारा तैयार किए गए कलात्मक उत्पादों में काशी की सांस्कृतिक विरासत, भारतीय परंपरा और उत्कृष्ट शिल्प कौशल की अद्भुत झलक देखने को मिलती है। उनके हस्तशिल्प उत्पाद देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी विशेष रूप से पसंद किए जाते हैं।

समारोह में वक्ताओं ने कहा कि अनिल कसेरा ने आधुनिकता के इस दौर में विलुप्त होती पारंपरिक कला को संरक्षित करने का सराहनीय कार्य किया है। उनकी मेहनत और रचनात्मकता ने बनारसी हस्तशिल्प को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। उनके द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रशंसा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं। प्रधानमंत्री ने “वोकल फॉर लोकल” और भारतीय पारंपरिक उत्पादों को बढ़ावा देने के अभियान के अंतर्गत काशी के शिल्पकारों एवं उनके उत्पादों की सराहना करते हुए स्थानीय हस्तकला को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर दिया था, जिसमें अनिल कसेरा जैसे शिल्पियों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

सम्मान प्राप्त करने के बाद अनिल कसेरा ने आयोजकों एवं सभी शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए गर्व का विषय है और इससे उन्हें अपनी कला एवं भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि काशी की पारंपरिक कला केवल रोजगार का माध्यम नहीं बल्कि भारतीय सांस्कृतिक धरोहर की पहचान है।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में पत्रकार, समाजसेवी, साहित्यकार, शिक्षाविद, कलाकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। समारोह का वातावरण सांस्कृतिक गरिमा और उत्साह से ओतप्रोत रहा।

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