साइकिल पर संडे: बीएचयू में साइकिल चलाकर दिया पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य का संदेश।

क्लाइमेट एजेंडा और बीएचयू -वसंत कन्या महाविद्यालय- म.ग. काशी विद्यापीठ के छात्रों ने मिलकर किया साइकिल पर सन्डे का आयोजन।

आज दिनांक 05 अप्रैल, 2026 को प्रातः 8 बजे से 10 बजे तक बीएचयू विश्वनाथ मंदिर, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय परिसर में क्लाइमेट एजेंडा संस्था के तहत संचालित हरित सफ़र अभियान के तत्वावधान में साइकिल पर सन्डे कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में क्लाइमेट एजेंडा की टीम के साथ बीएचयू और वसंत कन्या महाविद्यालय एवं म.ग. काशी विद्यापीठ के छात्र-छात्राओं, विशेषकर मास्टर ऑफ सोशल वर्क विभाग के इंटर्न और वोलंटियरों, ने सक्रिय भूमिका निभाई।

आम नागरिकों के बीच साइकिल चलाने की संस्कृति को पुनर्जीवित करना इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य था। न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से, बल्कि इसलिए भी क्योंकि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में साइकिल एक सबसे सुलभ, शून्य-उत्सर्जन परिवहन विकल्प है। परिवहन क्षेत्र वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का एक बड़ा हिस्सा है, और भारत के तेज़ी से बढ़ते शहरों में निजी मोटर वाहनों की बढ़ती संख्या वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन दोनों को गंभीर रूप से बढ़ा रही है। ऐसे में साइकिल जैसे नॉन-मोटराइज़्ड ट्रांसपोर्ट (NMT) को अपनाना न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह शहरी कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने, यातायात की भीड़ घटाने और शहरों को अधिक रहने योग्य बनाने की दिशा में एक ठोस कदम भी है।

कार्यक्रम का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष था — शहर प्रशासन से सुरक्षित साइकिल लेन और NMT के लिए सुरक्षित शहरी अवसंरचना की मांग उठाना। यह मांग इसलिए ज़रूरी है क्योंकि जब तक शहरों में साइकिल चलाने वालों के लिए सुरक्षित लेन, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित फुटपाथ और नॉन-मोटराइज़्ड ट्रांसपोर्ट NMT उपयोगकर्ताओं के लिए समर्पित स्थान नहीं होगा, तब तक साइकिल को प्रोत्साहित करना केवल एक आदर्श की बात बनकर रह जाएगी। बीएचयू जैसे तुलनात्मक रूप से सुरक्षित और नियंत्रित परिसर के बाहर सड़कों पर साइकिल चलाना आम नागरिकों के लिए जोखिम भरा है। सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर के बिना साइकिल संस्कृति को व्यापक और टिकाऊ रूप देना संभव नहीं।

इस आयोजन में MSW विभाग के छात्र-छात्राओं ने अग्रणी भूमिका निभाई। प्रमुख रूप से भाग लेने वाले वोलंटियरों में दीपक कोरी, तन्मय कुमार, वैभव, ऋतिका, अनन्या उपाध्याय, वैष्णव, प्रियांशी, रोहित और पवन शामिल रहे। क्लाइमेट एजेंडा की ओर से गीता पासवान ने वोलंटियरों और इंटर्न की पूरी टीम का नेतृत्व किया और कार्यक्रम को सुचारु रूप से संपन्न कराया।

कार्यक्रम के उपरांत क्लाइमेट एजेंडा की प्रोग्राम डायरेक्टर एकता शेखर ने वोलंटियरों इंटर्न और बीएचयू प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा —

“साइकिल का आविष्कार एक समय आवाजाही के संकट को हल करने के लिए हुआ था। आज जलवायु संकट को देखते हुए एक बार फिर हमें साइकिल को अपनाने की ज़रूरत है। अगर हम साइकिल को अपना फैशन स्टेटमेंट बनाने में सफल हो पाए, तो हम शहरी उत्सर्जन को भी नियंत्रित कर पाएंगे और अपने शहरी स्थानों को कंजेशन-फ्री बना सकेंगे। इसकी शुरुआत हम सब संडे से संडे करें, जिसे बाद में आगे और बढ़ाया जाए। लेकिन यह सब तभी संभव होगा जब शहर में साइकिलिंग का सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर मिले, अन्यथा ऐसे प्रयोग बीएचयू जैसे तुलनात्मक रूप से सुरक्षित परिसर के बाहर करना मुश्किल भी है और खतरनाक भी।

क्लाइमेट एजेंडा का यह प्रयास इस बात का प्रमाण है कि जलवायु परिवर्तन की लड़ाई केवल नीतियों के कमरों में नहीं, बल्कि आम नागरिकों की रोज़मर्रा की आदतों और सड़कों पर भी लड़ी जानी है, और साइकिल उस लड़ाई का एक सरल, सुलभ और प्रभावी हथियार है।

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