
सुल्तानपुर। भीषण गर्मी में जहां सरकार और प्रशासन यात्रियों को राहत देने के बड़े-बड़े दावे करता है वहीं रोडवेज परिसर में लगा वाटर कूलर खुद प्यासा नजर आ रहा है। हालात ऐसे हैं कि यह कूलर आये दिन या तो खराब रहता है या फिर कर दिया जाता है अब यह तकनीकी खराबी है या किसी की आर्थिक रणनीति। यह अपने आप में एक बड़ा यक्ष प्रश्न बन चुका है।
रोडवेज परिसर के अंदर कैंटीन संचालित है और यात्रियों का कहना है कि अगर वाटर कूलर नियमित रूप से चलता रहे तो दूर-दराज से आने वाले यात्रियों को मुफ्त में ठंडा पानी मिल जाएगा। ऐसे में बोतलबंद पानी और कैंटीन की बिक्री पर असर पड़ना तय है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर हर बार खराबी का शिकार सिर्फ वही मशीन क्यों होती है जो यात्रियों को मुफ्त राहत देती है। यात्रियों का कहना है कि गर्मी में घंटों बस का इंतजार करना पड़ता है लेकिन ठंडा पानी नसीब नहीं होता। मजबूरी में लोगों को महंगे दामों पर पानी खरीदना पड़ता है। रोडवेज परिसर में लगे वाटर कूलर की हालत देखकर ऐसा लगता है मानो वह यात्रियों की सुविधा के लिए नहीं, सिर्फ शोपीस के तौर पर लगाया गया हो। इस मामले में जब ARM से वार्ता की गई तो उन्होंने कहा जब मैं रहता हूं तब तो कूलर ठीक ही रहता है हो सकता है खराब हो गया हो दिखवाता हूं।
अब सवाल यह है कि क्या कूलर भी अधिकारियों की मौजूदगी देखकर ही काम करता है? और जैसे ही जिम्मेदार अधिकारी परिसर से बाहर जाते हैं मशीन भी छुट्टी पर चली जाती है। यात्रियों में इस व्यवस्था को लेकर भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि रोडवेज परिसर में यात्रियों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीरता दिखाई जानी चाहिए। वरना मुफ्त ठंडे पानी पर पहरा और यात्रियों की जेब पर हमला यही व्यवस्था की नई पहचान बन जाएगी।
जरूरत इस बात की है कि संबंधित अधिकारी केवल दिखवाने तक सीमित न रहें। बल्कि यह भी जांच करें कि आखिर बार-बार वाटर कूलर खराब होने के पीछे तकनीकी कारण हैं या फिर किसी की ठंडी कमाई का गर्म खेल