
वाराणसी। ग्रामीण बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए अवादा फाउंडेशन द्वारा जनपद सोनभद्र के खोड़ेला एवं चिचलिक गांवों में 7 दिवसीय समर कैंप का उत्साहपूर्ण शुभारंभ किया गया। यह समर कैंप प्रतिदिन प्रातः 7:30 बजे से 10:00 बजे तक आयोजित किया जाएगा,जिसमें बच्चों के शारीरिक,मानसिक,सांस्कृतिक एवं रचनात्मक विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। समर कैंप के प्रथम दिवस आयोजित ग्रैंड ओपनिंग कार्यक्रम में पूरे परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन,गणेश वंदना,मंत्रोच्चारण,प्रार्थना एवं गायत्री मंत्र के साथ हुई। इसके बाद बच्चों ने योग,पीटी,श्लोक पाठ,नृत्य,खेल गतिविधियों एवं विभिन्न रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। दोनों गांवों में आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 200 बच्चों एवं अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों ने अनुशासन एवं ऊर्जा के साथ सभी गतिविधियों में सहभागिता निभाई,वहीं अभिभावकों एवं ग्रामवासियों ने भी कार्यक्रम की सराहना करते हुए अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। समर कैंप के पहले ही दिन बच्चों में आत्मविश्वास,टीम भावना एवं रचनात्मकता का विशेष उत्साह देखने को मिला।इस अवसर पर चिचलिक विद्यालय प्रबंध समिति की अध्यक्षा श्रीमती कौशल्या देवी,गंगाधर,शुकालू यादव,धीरेन्द्र एवं श्रीमती अमरावती (आशा सहयोगिनी) सहित अनेक गणमान्य ग्रामीण उपस्थित रहे। वहीं अवादा फाउंडेशन की ओर से महेश कुमार माथुर,निखिल उत्तम,दीपशिखा श्रीवास्तव,शीलू द्विवेदी,राहुल सिंह पटेल,विश्वजीत,अमित,शशि शंकर मिश्रा एवं जितेश मिश्रा की गरिमामयी उपस्थिति रही।अवादा फाउंडेशन की निदेशक ऋतू पटवारी ने अपने संदेश में कहा कि,“बच्चों का समग्र विकास केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है,बल्कि उनके भीतर आत्मविश्वास,अनुशासन,रचनात्मकता एवं सकारात्मक सोच विकसित करना भी अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में इस समर कैंप का आयोजन किया जा रहा है। यह बच्चों को सीखने,खेलने एवं अपनी प्रतिभा को निखारने का सकारात्मक मंच प्रदान करेगा।”उन्होंने कहा कि अवादा फाउंडेशन भविष्य में भी शिक्षा,स्वास्थ्य,महिला सशक्तिकरण एवं सामुदायिक विकास के क्षेत्र में निरंतर कार्य करता रहेगा।ग्रामीण बच्चों के उज्ज्वल भविष्य एवं सर्वांगीण विकास की दिशा में यह समर कैंप एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। प्रथम दिवस की सफलता के बाद बच्चों एवं अभिभावकों में विशेष उत्साह एवं सकारात्मक वातावरण देखने को मिला।