24 बस्तियों में 500 से अधिक लोगों के साथ ली बाल श्रम मुक्त समाज की शपथ

वाराणसी, 12 जून 2026| विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर आज डॉ. शम्भूनाथ सिंह रिसर्च फाउंडेशन द्वारा अपनी सहयोगी संस्था क्राय एवं अन्य के सहयोग से बाल श्रम के खिलाफ एक वृहद जन-जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम फाउंडेशन के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाली बस्तियों क्रमशः अमरपुर, ढेलवरिया, गढ़हिया, दनियालपुर, पुलकोहना, सरायमोहाना, कोटवा और बरईपुर आदि में उत्साह के साथ आयोजित किया गया। इस अभियान में 500 से अधिक महिलाओ, बच्चो व स्थानीय लोगों ने प्रतिभाग किया| कार्यक्रम के दौरान किशोर-किशोरियों के लिए विशेष जागरूकता सत्र और प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया, जहाँ बच्चों ने अपनी आकांक्षाओं और सपनों को खुलकर साझा किया। पूरे समुदाय में एक विशाल रैली निकाली गई, जिसका उद्देश्य बाल श्रम के विरुद्ध जन-चेतना फैलाना था। कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी अभिभावकों द्वारा लिया गया संकल्प था, जहाँ समुदाय के 500 से अधिक लोगों ने सार्वजनिक रूप से शपथ ली कि वे अपने घरों, दुकानों या कारखानों में किसी भी बच्चे से मजदूरी नहीं कराएंगे और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ेंगे।

जागरूकता अभियान का शुभारम्भ करते हुए संस्था की परियोजना निदेशक डॉ. रोली सिंह ने कहा कि, बाल मजदूरी एक सामाजिक अभिशाप है, जिसे मिटाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। आज का यह 500 लोगों का संकल्प यह साबित करता है कि हमारा समाज अब बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए गंभीर है।

संस्था के महासचिव राजीव कुमार सिंह के कहा कि “बच्चे देश का भविष्य हैं। उनसे उनका बचपन छीनकर किसी भी कीमत पर विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि 10 से 30 जून तक चलने वाले इस सघन अभियान के माध्यम से हम समुदाय की भागीदारी से बाल श्रम के खिलाफ माहौल बनाएंगे तथा अपने कार्यक्षेत्र के सरकारी स्कूलों व अन्य सार्वजानिक स्थानों को ‘सुरक्षित बचपन क्षेत्र’ घोषित करेंगे| फीफा वर्ल्ड कप फुटबॉल की तर्ज़ पर बच्चे अपने सपनों से सजे जीवन के मैदान में ‘रेड कार्ड’ दिखाकर बाल श्रम को ‘आउट’ करने का संदेश देंगे। अभियान के अन्तर्गत स्थानीय युवाओं, शिक्षकों व जन प्रतिनिधियों के बीच मैत्रीपूर्ण फुटबॉल मैच का आयोजन कर खेल के माध्यम से ‘बाल श्रम को रेड कार्ड’ का संदेश भी दिया जाएगा। इस दौरान अभिभावक अपने बच्चों को नियमित स्कूल भेजने का सामूहिक संकल्प लेंगे। गृह संपर्क, चौपाल, बाल अधिकार चर्चा और वार्ड निगरानी समितियों की बैठकें लगातार आयोजित की जाएंगी। इस अभियान का मकसद है कि एक भी बच्चा शिक्षा की मुख्यधारा से न छूटे। उन्होंने नगर के सभी नागरिकों, युवाओं और प्रबुद्धजनों से अपील की है कि वे 10 से 30 जून तक चलने वाले इस पुनीत कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लें और ‘सुरक्षित बचपन’ के निर्माण में सहयोग दें।

इस सफल आयोजन को धरातल पर उतारने में परियोजना प्रबंधक द्वय दीक्षा सिंह व राजश्री शुक्ला तथा उनकी टीम के सदस्यों— मनोज, शमा, प्रांजल, रश्मि, आकांक्षा, मयंक, प्रीति, काजल और पूजा का योगदान सराहनीय रहा।

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