जनाबे सैय्यदा का रौज़ा तोड़े जाने के विरोध में निकला जुलूस। हाए ज़हरा की सदा के साथ उमड़ा हज़ारों का हुजूम।

वाराणसी। 28 मार्च अंजुमन हैदरी चौक वाराणसी के ऑफिस सेक्रेटरी ज़ुल्फ़िकार ज़ैदी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि अंजुमन हैदरी के तत्वाधान में शहर की मातमी अंजुमनों के आह्वाहन पर शनिवार को 10 बजे दिन में कालीमहल स्थित शिया मस्जिद से अलम का जुलूस उठाया गया जो अपने पारम्परिक रास्तों नईसड़क, दालमंडी, चौक, बुलानाला, मैदागिन, विशेश्वरगंज होता हुआ 12 बजे दिन में शिया जामा मस्जिद, दारानगर पहुँचकर जलसे में परिवर्तित हो गया। अंजुमन हैदरी के प्रेसिडेंट सैय्यद अब्बास मुर्तुज़ा शम्सी के निर्देशन एवं जनरल सेक्रेटरी नायब रज़ा के संयोजन में चल रहे इस जुलूस में बनारस की सभी मातमी अंजुमनों ने शिरकत की। जुलूस निकलने से पहले कालीमहल की मस्जिद में शाद सीवानी और ज़ैन बनारसी ने अपने कलाम पेश किए। तक़रीर करते हुए मौलाना तौसीफ़ अली ने कहा कि जब रसूल के इस दुनिया से पर्दा फ़रमाने के बाद उनकी इकलौती बेटी जनाबे सैय्यदा को इतना सताया गया कि उनको मर्सिया पढ़ना पड़ा और आज के 103 साल पहले मदीना स्थित उनके मक़बरे को ज़मींदोज़ कर दिया गया। आज हम उसी ज़ुल्म के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं।

ज्ञात हो कि आज से 103 वर्ष पूर्व इस्लामी माह शव्वाल की 8 तारीख को सऊदी अरब की तत्कालीन हुकूमत नें पैग़म्बर मुहम्मद साहब की इकलौती बेटी जनाबे सैय्यदा और 4 इमामों की क़ब्रों पर बने आलीशान रौज़ों को बुलडोज़र चला कर गिरा दिया था जिससे पूरी दुनिया में मुहम्मद साहब के परिवार से आस्था रखने वालों में ग़म ओ गुस्से की लहर दौड़ गई थी। विगत 102 साल से आज तक बनारस में अंजुमन हैदरी के तत्वाधान में विरोध स्वरूप एक जुलूस उठाया जाता है और सऊदी सरकार से उन रौज़ों के पुनर्निर्माण की मांग की जाती है एवं राष्ट्रपति के नाम हस्ताक्षरित मेमोरेंडम भेजा जाता है कि महामहिम यूनाइटेड नेशंस के माध्यम से सऊदी अरब की सरकार पर दबाव बनवा कर उन रौज़ों के पुनर्निर्माण का रास्ता सशक्त करें।

जुलूस में चल रहे हज़ारों अकीदतमंद आले सऊद होश में आओ.. ज़हरा का रौज़ा जल्द बनाओ की आवाज़ बुलंद कर रहे थे। बनारस के उलेमा की क़यादत में चलने वाला ये जुलूस शिया जामा मस्जिद, दारानगर पहुँच कर जलसे में परिवर्तित हो गया। प्रोफ़ेसर अज़ीज़ हैदर ने अपना कलाम पेश किया। मौलाना सैय्यद हैदर अब्बास, मौलाना तौसीफ़ अली ने तक़रीर करते हुए मदीना में मौजूद जन्नतुल बक़ी नामी क़ब्रिस्तान के एतेहसिक महत्व पर प्रकाश डाला एवं भारत सरकार से मांग की वो उनकी आस्था का मान रखते हुए सऊदी सरकार पर दबाव बनाए और उनकी मांग को पूरा करने की कोशिश करे। जलसे के बाद मजलिस को ख़िताब करते हुए मौलाना सैय्यद अमीन हैदर हुसैनी ने कहा कि रसूल और उनके घर वाले ही हमारे लिए सब कुछ हैं। हम उनके ऊपर किसी तरह का ज़ुल्म बर्दाश्त नहीं कर सकते यही वजह है कि आज 100 साल से ज़्यादा हो गए हम इस जुलूस को निकालकर दुनिया को बताते हैं कि हम ज़ालिम के साथ नहीं बल्कि मज़लूमों के साथ हैं। जलसे का संचालन सैय्यद अब्बास मुर्तज़ा शम्सी ने किया। जुलूस में शहर बनारस की सभी मातमी अंजुमनों समेत अंजुमन हैदरी के सभी पदाधिकारी एवं शहर के मोमिनीन हज़ारों की संख्या में मौजूद थे।

 

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